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Fact Check: 17 साल की नौकरी और छलके आंसू, Airtel के नाम पर वायरल हो रहे वीडियो का ये है असली सच

सोशल मीडिया पर 17 साल काम करने के बाद नौकरी से निकाले जाने और पीएफ (PF) न मिलने का दावा करने वाले एक व्यक्ति का वीडियो वायरल है। जानिए इस वायरल वीडियो के पीछे की पूरी सच्चाई और कंपनी से जुड़े सूत्रों का क्या कहना है।

Fact Check: 17 साल की नौकरी और छलके आंसू, Airtel के नाम पर वायरल हो रहे वीडियो का ये है असली सच
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नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसने एक नई बहस छेड़ दी है। वीडियो में एक व्यक्ति रोते हुए यह दावा कर रहा है कि 17 साल तक काम करने के बाद उसकी नौकरी अचानक चली गई और उसे न तो पीएफ (PF) मिला और न ही ग्रेच्युटी। कुछ ही घंटों में यह वीडियो लोगों की सहानुभूति और भारी गुस्से का कारण बन गया।



लेकिन, इस कहानी का सच वह नहीं है जो वीडियो में दिख रहा है।


क्या है एयरटेल से कनेक्शन?

इस वायरल वीडियो में टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल (Bharti Airtel) का नाम लिया जा रहा है। हालांकि, सच्चाई यह है कि वीडियो में दिख रहे व्यक्ति का एयरटेल के साथ कोई सीधा रोजगार संबंध नहीं था। दरअसल, यह व्यक्ति एक स्वतंत्र डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। इस डिस्ट्रीब्यूटर की अपनी नीतियां होती हैं जो भारतीय कानूनों के तहत काम करती है।


कंपनी से जुड़े सूत्रों ने यह भी साफ किया है कि इस व्यक्ति के सभी बकाया पैसों का भुगतान किया जा चुका है। तय शर्तों के अनुसार जो भी भुगतान होना था, वह पूरा कर दिया गया है। इसमें शामिल है:

  1. वेतन
  2. पीएफ (PF)
  3. ईएसआई (ESI)

चूंकि वह व्यक्ति चैनल पार्टनर की संस्था का हिस्सा था, इसलिए एयरटेल के स्तर पर कोई देनदारी नहीं बनती है।


वीडियो एक और बड़ी हकीकत की तरफ भी इशारा करता है। खुद संबंधित व्यक्ति ने सीमित शैक्षणिक योग्यता की बात कही है। यह उस बाज़ार की तस्वीर पेश कर रहा है कि अब रोज़गार महज़ एक नौकरी करना नहीं रह गया है बल्कि स्किल ड्रिवन बन चुका है।


सोशल मीडिया का सच और हम

इस घटना का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि वायरल वीडियो ने लोगों की भावनाओं को तो भड़का दिया, लेकिन तथ्य सामने आने के बाद पूरी तस्वीर ही बदल गई। डिजिटल युग में अधूरी जानकारी किस तरह तेजी से गलत धारणा बना सकती है, यह मामला उसका एक बड़ा उदाहरण बन गया है।


फिलहाल, यह घटना हम सभी के लिए एक बड़ा सवाल छोड़ जाती है: क्या हमें सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर कहानी को तुरंत सच मान लेना चाहिए, या फिर रुककर उसके पीछे की पूरी सच्चाई जानने की जरूरत है?

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