Public Khabar

बांदा पोर्नोग्राफी केस में ऐतिहासिक फैसला: पॉक्सो कोर्ट ने पति-पत्नी को सुनाई फांसी, पीड़ित बच्चों को 10-10 लाख मुआवजा

50 से अधिक बच्चों के यौन शोषण और डार्क वेब पर वीडियो बेचने का मामला, अदालत ने बताया ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’

बांदा पोर्नोग्राफी केस में ऐतिहासिक फैसला: पॉक्सो कोर्ट ने पति-पत्नी को सुनाई फांसी, पीड़ित बच्चों को 10-10 लाख मुआवजा
X

उत्तर प्रदेश के बांदा जिला से जुड़े बहुचर्चित पोर्नोग्राफी और बाल यौन शोषण मामले में पॉक्सो अदालत ने कड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। 160 पृष्ठों के विस्तृत निर्णय में अदालत ने आरोपी रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को मृत्युदंड की सजा दी है। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि दोनों दोषियों को फांसी पर लटकाकर मृत्यु दंड दिया जाए। इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि इस जघन्य अपराध के शिकार प्रत्येक पीड़ित बच्चे को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया जाए।


यह मामला 30 अक्टूबर 2020 को केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा दर्ज किया गया था। जांच में सामने आया कि आरोपी रामभवन ने 50 से अधिक नाबालिग बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न किया और इन घिनौने कृत्यों के वीडियो बनाकर उन्हें विदेशों में बेचने का नेटवर्क खड़ा किया। सीबीआई ने विवेचना के दौरान 16 नवंबर 2020 को सिंचाई विभाग में तैनात जूनियर इंजीनियर रामभवन को चित्रकूट से गिरफ्तार किया था। बाद में गवाहों को धमकाने और जांच में बाधा डालने के आरोप में उसकी पत्नी दुर्गावती को भी 28 दिसंबर 2020 को गिरफ्तार किया गया। तभी से दोनों आरोपी बांदा मंडल कारागार में निरुद्ध थे।


अदालत में सुनवाई के दौरान सीबीआई ने इस मामले में कुल 74 गवाहों को पेश किया। जांच और साक्ष्यों से यह साबित हुआ कि पति-पत्नी मिलकर गरीब और असहाय परिवारों के बच्चों को लालच देकर अपने जाल में फंसाते थे। बच्चों की उम्र 5 से 16 वर्ष के बीच थी, जबकि कुछ पीड़ित तीन वर्ष से भी कम उम्र के बताए गए। अपराध की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने माना कि दोनों आरोपी नाबालिगों के साथ सामूहिक रूप से दुष्कर्म करते थे, अश्लील फोटो और वीडियो तैयार करते थे और उन्हें डार्क वेब के जरिए अंतरराष्ट्रीय पेडोफाइल नेटवर्क तक पहुंचाते थे।


पॉक्सो अदालत ने अपने फैसले में इस अपराध को समाज और मानवता के खिलाफ बताते हुए इसे “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” श्रेणी में रखा। अदालत ने कहा कि इस तरह के अपराध न केवल पीड़ित बच्चों का भविष्य तबाह करते हैं, बल्कि समाज की आत्मा को भी झकझोर देते हैं। इसी आधार पर दोनों दोषियों को मृत्युदंड दिया गया। साथ ही, पीड़ित बच्चों के पुनर्वास और भविष्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार को मुआवजा देने का आदेश भी पारित किया गया है।

Tags:
Next Story
Share it