उत्तर प्रदेश के अन्नदाताओं पर कुदरत की दोहरी मार: क्या 24 घंटे की यह समय सीमा बदल पाएगी किसानों की तकदीर?
असमय मौसम और आगजनी से मची तबाही के बाद सरकार का बड़ा कदम, क्या तय समय में जमीनी स्तर पर पहुंचेगी मदद?

उत्तर प्रदेश की ग्रामीण बेल्ट में इस वक्त एक अजीब सी बेचैनी और सन्नाटा पसरा हुआ है। आसमान से बरसी आफत और कहीं-कहीं भड़की लपटों ने किसानों की महीनों की मेहनत को मिट्टी में मिला दिया है। इस चुनौतीपूर्ण समय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शासन के तमाम बड़े अधिकारियों को तलब कर एक ऐसा फरमान जारी किया है, जिसने प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि नुकसान का आकलन करने के लिए दफ्तरों में बैठकर कागजी खानापूर्ति करने के बजाय, अधिकारी सीधे खेतों तक पहुंचें और 24 घंटे के भीतर पीड़ित पक्षों को राहत राशि का हस्तांतरण सुनिश्चित करें। यह आदेश न केवल एक प्रशासनिक निर्देश है, बल्कि उन हजारों किसानों के लिए उम्मीद की एक किरण भी है जो अपनी रबी की फसलों को बर्बाद होते देख निराश थे।
हाल के दिनों में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आई असमय बारिश और भारी ओलावृष्टि की खबरों ने कृषि क्षेत्र की कमर तोड़ दी है। इतना ही नहीं, कुछ क्षेत्रों में आगजनी की घटनाओं ने पकी-पकाई फसलों को राख में तब्दील कर दिया, जिससे अन्नदाता के सामने अब जीवन-यापन का संकट खड़ा हो गया है। बुधवार की सुबह जब मुख्यमंत्री ने लखनऊ में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की, तो उनके तेवर बेहद सख्त और संवेदनशील थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस प्राकृतिक आपदा की घड़ी में किसान खुद को अकेला महसूस न करे। उन्होंने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और किसी भी स्तर पर देरी या भ्रष्टाचार की गुंजाइश न छोड़ने की चेतावनी दी है। यह निर्देश उन शिकायतों के जवाब में भी देखा जा रहा है, जिनमें अक्सर मुआवजे के भुगतान में महीनों की देरी की बात सामने आती रही है।
जमीनी हकीकत यह है कि सरकारी तंत्र के लिए इतने कम समय में सर्वेक्षण और भुगतान की प्रक्रिया को पूरा करना एक बड़ी परीक्षा साबित होने वाला है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे न केवल नुकसान का सर्वे करें, बल्कि यह भी सुनिश्चित करें कि सहायता राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में पहुंचे। स्थानीय प्रशासन अब इस कार्य के लिए विशेष टीमों का गठन कर रहा है, जो प्रभावित गांवों का दौरा करेंगी। किसानों की प्रतिक्रियाओं पर गौर करें तो उनमें एक ओर फसल खोने का गम है, तो दूसरी ओर सरकार के इस त्वरित एक्शन से थोड़ी राहत भी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वास्तव में 24 घंटे के भीतर प्रशासन उन हाथों तक मदद पहुंचा पाएगा, जो इस वक्त कुदरत के प्रकोप से छलनी हैं।
