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फरीदाबाद का साइको किलर सिंह राज उम्रकैद की सजा से दंडित, 3 नाबालिगों समेत 6 हत्याओं में दोषी करार

सीरियल मर्डर केस में कोर्ट का बड़ा फैसला, तकनीकी साक्ष्य और एक जैसे हत्या पैटर्न से साबित हुआ अपराध

फरीदाबाद का साइको किलर सिंह राज उम्रकैद की सजा से दंडित, 3 नाबालिगों समेत 6 हत्याओं में दोषी करार
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हरियाणा जिले के फरीदाबाद को दहला देने वाले बहुचर्चित सीरियल किलिंग मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कुख्यात साइको किलर सिंह राज को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने उसे तीन नाबालिग लड़कियों समेत कुल छह युवतियों की हत्या का दोषी करार दिया। इसके साथ ही आरोपी पर एक लाख रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है। वर्षों से लंबित इस मामले में पेश किए गए तकनीकी सबूत, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और सभी हत्याओं में सामने आए एक जैसे पैटर्न ने आरोपी की भूमिका को पूरी तरह साबित कर दिया।

अदालत के समक्ष अभियोजन पक्ष ने विस्तार से बताया कि सिंह राज हर वारदात में एक ही तरीका अपनाता था। वह पहले गरीब परिवारों की लड़कियों से जान-पहचान बढ़ाता, उनके घर आने-जाने लगा और धीरे-धीरे भरोसा हासिल करता था। इसके बाद मौका देखकर वह पीड़िताओं के साथ छेड़छाड़ करता। जब लड़कियां इसका विरोध करतीं, तो वह बेरहमी से उनका गला घोंटकर हत्या कर देता। हत्या के बाद शव को बोरे में भरकर साइकिल के जरिए आगरा नहर तक ले जाता और सबूत मिटाने के इरादे से पानी में फेंक देता था।

जांच में सामने आया कि आरोपी ने खासतौर पर कमजोर और आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों की लड़कियों को निशाना बनाया, ताकि उनके परिजन आसानी से आवाज न उठा सकें। इनमें से अधिकांश पीड़िताएं नाबालिग थीं। पुलिस जांच के दौरान मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल्स, घटनास्थलों की समानता और समय-रेखा के तकनीकी विश्लेषण ने यह स्पष्ट कर दिया कि सभी हत्याओं के पीछे एक ही व्यक्ति शामिल था।

सिंह राज फरीदाबाद के जसाना गांव का रहने वाला है और सेक्टर-16 स्थित एक निजी अस्पताल में सिक्योरिटी गार्ड के रूप में काम करता था। उसके पारिवारिक संबंध पूरी तरह टूट चुके थे और कोई भी रिश्तेदार उससे संपर्क नहीं रखना चाहता था। अदालत में यह भी सामने आया कि उसकी आपराधिक प्रवृत्ति वर्षों पुरानी थी। वर्ष 1987 में उसने अपने ही चाचा और चचेरे भाई की हत्या की थी, जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। हालांकि उस समय पुख्ता सबूत न मिलने के कारण वह अदालत से बरी हो गया था।

प्रॉसिक्यूशन के अनुसार, उसी दौरान बच निकलना उसके लिए अपराध की राह को और आसान बना गया। बाद के वर्षों में उसकी हिंसक मानसिकता और अधिक घातक होती चली गई। इस केस में अदालत ने माना कि आरोपी समाज के लिए गंभीर खतरा था और उसके अपराध न केवल जघन्य थे, बल्कि पूरी तरह योजनाबद्ध भी थे। यही वजह रही कि कोर्ट ने उसके लिए कठोरतम सजा को उचित माना।

इस फैसले के बाद पीड़ित परिवारों को लंबे समय बाद न्याय की उम्मीद जगी है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ऐसे अपराध मानवता को शर्मसार करते हैं और समाज में भय का वातावरण पैदा करते हैं, इसलिए दोषी को किसी भी प्रकार की नरमी नहीं दी जा सकती।

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