दिल्ली विधानसभा में बजट से ठीक पहले हड़कंप: क्या रुक जाएगा कार्यवाही का पहिया?
लोकतंत्र के मंदिर पर मंडराया संकट का साया, हाई-प्रोफाइल नामों के उल्लेख ने बढ़ाई सुरक्षा एजेंसियों की चिंता।

राजधानी दिल्ली के सियासी गलियारे में आज उस वक्त सनसनी फैल गई जब एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण दिन की शुरुआत खौफनाक संदेशों के साथ हुई। दिल्ली सरकार द्वारा बजट पेश किए जाने की तैयारियों के बीच विधानसभा परिसर और उससे जुड़े प्रमुख स्थानों को निशाना बनाने की बात सामने आई है। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने न केवल प्रशासनिक अमले के हाथ-पांव फुला दिए हैं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था की अभेद्य दीवारों पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। सुबह का सूरज अभी पूरी तरह चढ़ा भी नहीं था कि डिजिटल माध्यम से आए कुछ संदेशों ने सत्ता के गलियारों में हड़कंप मचा दिया, जिसके बाद आनन-फानन में पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया।
सुरक्षा एजेंसियों से प्राप्त विवरण के मुताबिक, यह खलबली तब शुरू हुई जब सुबह लगभग 7:28 बजे दिल्ली विधानसभा के आधिकारिक तंत्र को एक धमकी भरा ईमेल प्राप्त हुआ। इसके ठीक कुछ मिनटों बाद, यानी 7:49 बजे, विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता के पास भी इसी तरह का एक डराने वाला संदेश पहुँचा। इन ईमेल संदेशों में केवल विधानसभा भवन ही नहीं, बल्कि पास के मेट्रो स्टेशन को भी दहलाने की बात कही गई थी। बजट सत्र जैसे बड़े आयोजन से ठीक पहले इस तरह की चुनौती मिलना किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रहा है, जिसके चलते सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत स्पीकर के कक्ष सहित पूरे परिसर की बारीकी से तलाशी लेना शुरू कर दिया है।
इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला और पेचीदा पहलू वह है, जिसमें देश की दिग्गज राजनीतिक हस्तियों के नामों का जिक्र किया गया है। जानकारी के अनुसार, ईमेल भेजने वाले ने एलजी तरनजीत संधू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर जैसे कद्दावर नेताओं के नामों का उल्लेख किया है। इतना ही नहीं, संदेश में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा का भी नाम शामिल है, जिससे जांच अधिकारियों का माथा ठनक गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को भी व्यक्तिगत रूप से इसी तरह का धमकी भरा मेल मिलने की पुष्टि हुई है, जो इस पूरे घटनाक्रम को और अधिक गंभीर और व्यक्तिगत हमले की श्रेणी में लाकर खड़ा कर देता है।
फिलहाल, दिल्ली पुलिस की साइबर सेल और आतंकवाद निरोधी इकाइयां इन ईमेल्स के स्रोत का पता लगाने में जुटी हुई हैं। बजट सत्र की कार्यवाही को देखते हुए विधानसभा के आसपास के सुरक्षा घेरे को कई गुना मजबूत कर दिया गया है और चप्पे-चप्पे पर कमांडो तैनात किए गए हैं। जांच का मुख्य केंद्र यह पता लगाना है कि क्या यह किसी शरारती तत्व की सोची-समझी हरकत है या इसके पीछे कोई गहरी राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी साजिश छिपी है। प्रशासन के लिए चुनौती केवल बजट को सुचारू रूप से पेश करने की ही नहीं है, बल्कि उस डर को खत्म करने की भी है जिसने आज सुबह लोकतंत्र के इस प्रमुख केंद्र को अपनी गिरफ्त में ले लिया।
