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फरीदाबाद के पेट्रोल पंप पर पंचर बना रहा था 'खास' मेहमान, गाजियाबाद पुलिस की छापेमारी के बाद जो सच निकला उसने सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ाए

एक साधारण सी दुकान और उसके पीछे छिपा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क; क्या आपके पड़ोस में रहने वाला शख्स वाकई वही है जो वह दिखाई देता है?

फरीदाबाद के पेट्रोल पंप पर पंचर बना रहा था खास मेहमान, गाजियाबाद पुलिस की छापेमारी के बाद जो सच निकला उसने सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ाए
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देश की सुरक्षा और आंतरिक सतर्कता के मोर्चे पर एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है, जिसने यह साबित कर दिया है कि जासूसी के तार कितने साधारण और अप्रत्याशित रास्तों से जुड़े हो सकते हैं। गाजियाबाद पुलिस ने फरीदाबाद के एक शांत इलाके में छिपे एक संदिग्ध को दबोचा है, जिसकी गतिविधियां सीमा पार के नेटवर्क से जुड़ी होने का अंदेशा है। यह गिरफ्तारी किसी बड़े फिल्मी ड्रामे से कम नहीं थी, क्योंकि आरोपी एक बेहद सामान्य पहचान के साथ आम जनता के बीच घुला-मिला हुआ था। पुलिस की इस दबिश ने उन तमाम इलाकों में चौकसी बढ़ा दी है जहां बाहरी राज्यों से आए लोग अपनी पहचान छिपाकर रह रहे हैं। जांच के केंद्र में एक ऐसा व्यक्ति है जो पिछले कुछ समय से दिल्ली-एनसीआर के महत्वपूर्ण केंद्रों की रेकी या सूचनाएं साझा करने के संदेह के दायरे में था।


पुलिस की गिरफ्त में आए इस शख्स की पहचान नौशाद अली उर्फ लालू के रूप में हुई है, जो मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के काटी थाना क्षेत्र स्थित हरचंदा गांव का रहने वाला है। वह पिछले तीन महीनों से फरीदाबाद के नचौली गांव में स्थित एक पेट्रोल पंप पर पंचर सुधारने की छोटी सी दुकान चला रहा था। किसी को कानो-कान खबर नहीं थी कि वाहनों के टायर ठीक करने वाला यह शख्स कथित तौर पर पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले एक बड़े गिरोह का सक्रिय हिस्सा हो सकता है। आरोपी ने अपनी दुकान को एक ढाल की तरह इस्तेमाल किया, ताकि वह सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बच सके और अपनी संदेहास्पद गतिविधियों को अंजाम दे सके। पेट्रोल पंप पर उसकी मौजूदगी उसे कई तरह के लोगों से मिलने और सूचनाएं एकत्र करने का सहज अवसर प्रदान कर रही थी।


जांच में यह भी सामने आया है कि नौशाद अली ने इस स्थान का चयन काफी सोच-समझकर किया था। नचौली गांव का यह पेट्रोल पंप करीब एक साल पहले ही खुला था, जहां उसने अपनी पंचर की दुकान स्थापित की। गाजियाबाद पुलिस को मिली सटीक खुफिया जानकारी के बाद जब फरीदाबाद में छापेमारी की गई, तब इस पूरे मायाजाल का पर्दाफाश हुआ। आरोपी से फिलहाल पूछताछ जारी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने अब तक कितनी संवेदनशील जानकारी सीमा पार भेजी है और इस जासूसी सिंडिकेट में उसके साथ और कौन-कौन लोग शामिल हैं। पुलिस और खुफिया एजेंसियां अब उसके मोबाइल रिकॉर्ड्स और बैंक खातों की भी बारीकी से जांच कर रही हैं ताकि वित्तीय लेन-देन के स्रोतों का पता लगाया जा सके।

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