गुरुग्राम किडनैपिंग केस में बरेली सड़क हादसा: ड्राइवर ने खोले कई अहम राज़, पुलिस जांच में नया खुलासा
दिल्ली-लखनऊ नेशनल हाईवे पर हुए दर्दनाक हादसे के बाद, घायलों और मृतकों के आपसी रिश्ते पर उठ रहे हैं गंभीर सवाल, जांच में जुटा प्रशासन।

उत्तर प्रदेश के बरेली में दिल्ली-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुए एक भीषण सड़क हादसे ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। सीबीगंज थाना क्षेत्र के परधौली गांव के पास रविवार की दोपहर एक अनियंत्रित बोलेरो कार ने पहले मोटरसाइकिल को टक्कर मारी और फिर सड़क किनारे खड़े एक टैंकर में जा घुसी। हादसा इतना भयावह था कि दोनों वाहनों के परखच्चे उड़ गए। इस दिल दहला देने वाली घटना में पांच लोगों की मौके पर ही जान चली गई, जिनमें बोलेरो सवार सिकंदर कुमार (28), मनमोहन (42) और एक अन्य अज्ञात व्यक्ति के साथ-साथ मोटरसाइकिल पर जा रहे शमसाद (45) और मुमताज (65) शामिल थे। इस हादसे ने प्रशासन और पुलिस को भी सकते में डाल दिया है, खासकर जब जांच के दौरान इसमें एक सनसनीखेज पहलू सामने आया।
शुरुआत में यह महज एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना लग रही थी, लेकिन जब पुलिस ने बोलेरो में घायल हुए ड्राइवर प्रिंस से सख्ती से पूछताछ की, तो परतें खुलने लगीं। घायलों में प्रिंस के अलावा दो बच्चे और दो अन्य लोग शामिल थे, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रिंस से पूछताछ के दौरान पुलिस को उसके बयानों में कई विरोधाभास नज़र आए, जिसके बाद जब उससे कड़ाई से पूछताछ की गई तो उसने एक चौंकाने वाला खुलासा किया। प्रिंस ने बताया कि इस हादसे में मारे गए तीन लोग - सिकंदर, मनमोहन और वह अज्ञात व्यक्ति - दरअसल उसके साथी थे। वे सभी मिलकर हरियाणा के गुरुग्राम से दो बच्चों को किडनैप कर ला रहे थे।
पुलिस ने बताया कि आरोपी मनमोहन, जो इस हादसे में मारा गया, गुरुग्राम में ऑटो चलाने वाले मनोज की नाबालिग बेटी से शादी करना चाहता था। मनोज इस रिश्ते का कड़ा विरोध कर रहा था। इसी विरोध के चलते, आरोपी मनमोहन ने अपने साथियों के साथ मिलकर मनोज और उसके दोनों बच्चों का अपहरण कर लिया था। इस संबंध में मनोज की पत्नी पूजा ने गुरुग्राम के डीएलएफ (प्रथम) थाने में प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज कराई थी। प्रिंस के इस बयान के बाद, यह साफ हो गया कि यह कोई सामान्य दुर्घटना नहीं थी, बल्कि एक सुनियोजित अपहरण के प्रयास का भयावह अंत था।
इस खुलासे के बाद बरेली और गुरुग्राम दोनों जगहों की पुलिस सक्रिय हो गई है। गुरुग्राम पुलिस ने इस मामले की जांच तेज कर दी है और आरोपियों के अन्य संभावित साथियों का पता लगाने में जुटी है। घायल बच्चों का इलाज बरेली के अस्पताल में जारी है, और उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। हादसे के वक्त बोलेरो की तेज रफ्तार ने इसे एक भयानक मोड़ दे दिया, जिससे न केवल आरोपियों और किडनैप हुए लोगों को नुकसान पहुँचा, बल्कि निर्दोष मोटरसाइकिल सवारों को भी अपनी जान गंवानी पड़ी। पुलिस अब इस पूरे घटनाक्रम की कड़ी से कड़ी जोड़ने की कोशिश कर रही है, ताकि यह समझा जा सके कि आरोपी किस तरह से इस अपहरण को अंजाम देने की योजना बना रहे थे और उनका असली मकसद क्या था। स्थानीय लोग भी इस खबर से सहमे हुए हैं और कानून-व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। यह घटना एक बार फिर से सुरक्षा व्यवस्था और सड़क सुरक्षा की ओर ध्यान आकर्षित कर रही है। पुलिस का कहना है कि वे इस मामले में निष्पक्ष जांच करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि पीड़ितों को न्याय मिले।
