हापुड़ में खाकी की भारी चूक: परिजन थाने में ढूंढते रहे और पुलिस ने गुपचुप तरीके से क्यों कर दिया 'अंतिम काम'?
सिंभावली में लापता युवक की तलाश और खाकी की कार्यप्रणाली पर उठे संगीन सवाल, दो पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज।

उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले से पुलिसिया कार्यशैली को कटघरे में खड़ा करने वाला एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने मानवीय संवेदनाओं और प्रशासनिक जिम्मेदारी के बीच की खाई को उजागर कर दिया है। सिंभावली थाना क्षेत्र के माधापुर गांव के रहने वाले प्रशांत कुमार (उर्फ पप्पू) के परिवार के लिए इंसाफ की तलाश अब एक गहरे आक्रोश में बदल चुकी है। दरअसल, जिस युवक को घरवाले जिंदा ढूंढने के लिए थाने की चौखट पर माथा टेक रहे थे, पुलिस ने उसे 'अज्ञात' मानकर उसकी पहचान किए बिना ही अंतिम विदाई दे दी। यह मामला तब खुला जब परिजनों को खुद ही कड़ियां जोड़नी पड़ीं और पता चला कि पुलिस ने न केवल शिनाख्त की प्रक्रिया को नजरअंदाज किया, बल्कि एक लापता इंसान को लावारिस घोषित कर पूरी फाइल ही बंद कर दी।
घटनाक्रम की शुरुआत 1 अप्रैल 2026 से होती है, जब प्रशांत अपने मित्रों के संग गंगा स्नान की बात कहकर घर से निकला था। रास्ते में सिखैड़ा के समीप उसकी मोटरसाइकिल दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने उसे उपचार के लिए मेरठ मेडिकल कॉलेज भेजा। विडंबना देखिए कि एक तरफ प्रशांत अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा था और अंततः दम तोड़ दिया, वहीं दूसरी ओर उसके परिजन 2 अप्रैल से ही सिंभावली थाने में गुमशुदगी दर्ज कराने की मिन्नतें कर रहे थे। आरोप है कि पुलिस टालमटोल करती रही और जब 6 अप्रैल को रिपोर्ट दर्ज की गई, तब तक पुलिस 5 अप्रैल को ही प्रशांत के शव का 'अज्ञात' के रूप में अंतिम संस्कार कर चुकी थी। परिजनों को इस बात की भनक तक नहीं लगने दी गई कि जिस व्यक्ति की वे तलाश कर रहे हैं, उसकी बाइक थाने के यार्ड में ही खड़ी थी।
9 अप्रैल को जब परिजनों ने थाने में प्रशांत की बाइक देखी, तब जाकर पुलिस की इस घोर लापरवाही का कच्चा चिट्ठा खुला। पुलिस के पास युवक की तस्वीर और जानकारी होने के बावजूद उसे सार्वजनिक न करने और परिजनों को सूचित न करने के कारण ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर प्रदर्शन कर रहे लोगों का सीधा सवाल है कि जब युवक की पहचान के साधन मौजूद थे, तो इतनी जल्दबाजी में शव को क्यों जलाया गया? मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने कड़ा रुख अपनाया है और प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए दो पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। फिलहाल, इलाके में तनावपूर्ण शांति है और पीड़ित परिवार व्यवस्था से उस 'अंतिम दर्शन' के अधिकार का हिसाब मांग रहा है, जो उनसे प्रशासनिक ढिलाई के कारण छीन लिया गया।
