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हाईवे पर तीन सेकंड की झपकी बन रही मौत की वजह माइक्रो स्लीप से बढ़ रहा हादसों का खतरा

80 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पर तीन सेकंड की झपकी में 65 मीटर तक फिसल सकता है वाहन, सड़क सुरक्षा परिषद के अध्ययन में चौंकाने वाले तथ्य

हाईवे पर तीन सेकंड की झपकी बन रही मौत की वजह माइक्रो स्लीप से बढ़ रहा हादसों का खतरा
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तीन सेकंड की झपकी बन सकती है जानलेवा

एक्सप्रेसवे और हाईवे पर सफर करने वालों के लिए एक गंभीर चेतावनी सामने आई है। मात्र तीन सेकंड की झपकी, जिसे माइक्रो स्लीप कहा जाता है, किसी भी पल बड़े सड़क हादसे में बदल सकती है। भारतीय सड़क सुरक्षा परिषद और क्षेत्रीय परिवहन विभाग आगरा के संयुक्त अध्ययन में पाया गया है कि 80 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल रहा वाहन यदि तीन सेकंड के लिए भी अनियंत्रित हो जाए, तो वह करीब 65 मीटर तक बिना नियंत्रण के आगे बढ़ सकता है। यही दूरी अक्सर जानलेवा दुर्घटनाओं की वजह बनती है।

परियोजना सतर्क के तहत हुआ अध्ययन

यह अध्ययन केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की परियोजना सतर्क के अंतर्गत किया गया। इसमें आगरा से गुजरने वाले हाईवे, एक्सप्रेसवे और इनर रिंग रोड पर पिछले दो वर्षों में हुए हादसों का विश्लेषण किया गया। साथ ही 1,532 वाहन चालकों की मानसिक और शारीरिक स्थिति की भी जांच की गई।

तकनीक भी माइक्रो स्लीप के आगे बेबस

रिपोर्ट में बताया गया कि एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीक पहियों को लॉक होने से तो बचा लेती है, लेकिन माइक्रो स्लीप की स्थिति में चालक को ब्रेक लगाने का आभास ही नहीं होता। ऐसे में तकनीक भी किसी मदद की स्थिति में नहीं रहती।

लगातार 16 घंटे ड्राइविंग बना बड़ा खतरा

परिवहन विभाग के अनुसार लगभग 70 प्रतिशत चालक बिना पर्याप्त विश्राम के लगातार 16 घंटे तक वाहन चलाते हैं। यह आदत माइक्रो स्लीप के खतरे को कई गुना बढ़ा देती है। अध्ययन के दौरान चालकों का पोलेरीमेट्री टेस्ट और रिएक्शन टाइम टेस्ट किया गया।

रिएक्शन टाइम में खतरनाक देरी

एक स्वस्थ व्यक्ति का सामान्य रिएक्शन टाइम 0.75 से 1 सेकंड के बीच होता है, जबकि अधिकांश चालकों का रिएक्शन टाइम ढाई से तीन सेकंड तक पाया गया। इसका अर्थ है कि ब्रेक लगाने में ही तीन सेकंड की देरी हो रही थी, जो तेज रफ्तार वाहन के लिए बेहद खतरनाक है।

नींद की भारी कमी ने बढ़ाया जोखिम

स्लीप लॉग एनालिसिस टेस्ट में कई ड्राइवर ऐसे मिले जो 48 घंटे में सिर्फ चार घंटे ही सो पाए थे। नींद भगाने के लिए वे अत्यधिक चाय या नशीले पदार्थों का सहारा ले रहे थे, जो शरीर और दिमाग को और अधिक थका देता है।

माइक्रो स्लीप के लक्षण और खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि माइक्रो स्लीप अचानक आता है और चालक को इसका आभास भी नहीं होता। कुछ सेकंड के लिए आंखें बंद होना, सिर झुक जाना या ध्यान भटक जाना ही काफी है कि वाहन नियंत्रण से बाहर चला जाए।

हाईवे पर खतरा कई गुना बढ़ जाता है

सड़क सुरक्षा परिषद के अनुसार माइक्रो स्लीप को सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज करना भारी भूल हो सकती है। खासकर हाईवे और एक्सप्रेसवे पर, जहां रफ्तार ज्यादा होती है, वहां यह जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

परिवहन विभाग की अपील

वाहन चालकों से कहा गया है कि लंबी यात्रा से पहले पूरी नींद लें, हर दो से तीन घंटे में वाहन रोककर विश्राम करें और आंखों में भारीपन महसूस होते ही ड्राइविंग बंद कर दें। चाय या नशीले पदार्थों पर निर्भर रहने के बजाय शरीर को प्राकृतिक आराम देना ही सबसे सुरक्षित उपाय है।

सड़क सुरक्षा में चालक की स्थिति सबसे अहम

यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि सड़क हादसों में सिर्फ तेज रफ्तार या खराब सड़कें ही जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि चालक की मानसिक और शारीरिक स्थिति भी उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। माइक्रो स्लीप को समझना और उससे बचाव करना सड़क सुरक्षा की दिशा में एक जरूरी कदम है।

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