क्या होर्मुज का यह नया संकट दुनिया को अंधेरे में धकेल देगा? भारत की इस चेतावनी ने मचाई खलबली
खाड़ी के मुहाने पर बढ़ता तनाव और एक देश की ऐसी पीड़ा, जिसने अंतरराष्ट्रीय मंच पर सबको सोचने पर मजबूर कर दिया।

मिडिल ईस्ट के सुलगते रेगिस्तान से उठी जंग की लपटें अब उस मुकाम पर पहुंच गई हैं, जहां से वापसी का रास्ता धुंधला दिखाई दे रहा है। अमेरिकी प्रशासन के हालिया सख्त रुख ने इस पूरे क्षेत्र की भू-राजनीतिक स्थिति को एक ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया है, जिसे विशेषज्ञ 'नेक्स्ट लेवल' का टकराव मान रहे हैं। अमेरिका और इजरायल की साझा रणनीति के केंद्र में अब सीधे तौर पर ईरान है, जिसके कारण सामरिक रूप से दुनिया के सबसे संवेदनशील जलमार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' पर संकट के बादल और गहरे हो गए हैं। इस तनावपूर्ण माहौल के बीच ब्रिटेन की विशेष पहल पर बुलाई गई एक आपातकालीन ऑनलाइन बैठक ने वैश्विक स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। इस डिजिटल महामंथन में 60 से अधिक प्रभावशाली देशों ने शिरकत की, जिसका एकमात्र उद्देश्य व्यापारिक धमनियों को फिर से सुचारू रूप से खोलना था। इस उच्च स्तरीय संवाद में भारत की उपस्थिति और उसका पक्ष चर्चा का मुख्य विषय बनकर उभरा।
इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने जब अपनी बात रखी, तो कमरे में मौजूद सन्नाटा गहरा गया। उन्होंने एक ऐसी कड़वी सच्चाई को उजागर किया जिसने इस युद्ध की मानवीय कीमत को सबके सामने ला दिया। भारतीय विदेश सचिव ने स्पष्ट किया कि सरकारी आंकड़ों की मानें तो विदेशी जहाजों पर अपनी सेवाएं दे रहे तीन भारतीय नाविक इस रस्साकशी की भेंट चढ़ चुके हैं। भारत ने दोटूक शब्दों में कहा कि वह उन चुनिंदा देशों में से है जिसने व्यापारिक समुद्री मार्गों पर हो रहे हमलों के दौरान अपने लोगों को खोया है। यह बयान केवल एक शोक संदेश नहीं था, बल्कि उन वैश्विक शक्तियों के लिए एक आईना भी था जो युद्ध के मैदान में रणनीतियां बुन रही हैं।
भारत ने अपनी कूटनीतिक संजीदगी का परिचय देते हुए इस बात पर जोर दिया कि बंदूकों और मिसाइलों के शोर में कभी भी स्थाई समाधान नहीं छिपा होता। विदेश सचिव ने आह्वान किया कि इस उलझन को सुलझाने का एकमात्र माध्यम संवाद और शांतिपूर्ण कूटनीति ही है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे तनाव को कम करने के लिए तत्काल कदम उठाएं और सभी संबंधित पक्षों को फिर से बातचीत की मेज पर लाएं। भारत की चिंता केवल अपने नागरिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह उस व्यापक खतरे की ओर भी इशारा कर रहा है जो होर्मुज ब्लॉकेड के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर मंडरा रहा है। यह जलमार्ग दुनिया की तेल और गैस की जरूरतों की लाइफलाइन माना जाता है और इसमें आने वाला कोई भी अवरोध पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को पटरी से उतारने की क्षमता रखता है।
फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच की यह संकरी सी पट्टी आज दुनिया के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुकी है। ईरान द्वारा इस रास्ते को लगभग अवरुद्ध कर दिए जाने के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में जो उछाल आया है, उसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ने लगा है। भारत ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा एक ऐसे दौर में पहुंच जाएगी जहां से सुधार की गुंजाइश कम होगी। विदेश सचिव मिसरी ने इस बात को रेखांकित किया कि समुद्री व्यापार की स्वतंत्रता और नाविकों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। भारत का रुख साफ है कि वह किसी भी पक्ष के उकसावे के बजाय एक ऐसे मध्यस्थ और शांति दूत की भूमिका देख रहा है, जो दुनिया को ऊर्जा के इस महासंकट से बाहर निकाल सके।
