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हैदराबाद के खैटलापुर में बंद दरवाजे के पीछे पसरा सन्नाटा, एक ही झटके में खत्म हुआ पूरा परिवार!

वारंगल से वापसी के चंद घंटों बाद ऐसा क्या हुआ? खैटलापुर की इस खौफनाक वारदात ने सबको झकझोरा

हैदराबाद के खैटलापुर में बंद दरवाजे के पीछे पसरा सन्नाटा, एक ही झटके में खत्म हुआ पूरा परिवार!
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हैदराबाद के कुकटपल्ली स्थित खैटलापुर इलाके में एक ऐसी हृदयविदारक घटना घटी है, जिसने सामाजिक ताने-बाने और घरेलू कलह के खौफनाक परिणामों पर एक गंभीर बहस छेड़ दी है। मंगलवार की दोपहर जब मोहल्ले में लोग अपने रोजमर्रा के कामों में मशगूल थे, तब एक घर के भीतर तीन जिंदगियां खामोश हो चुकी थीं। पुलिस तफ्तीश में जो प्राथमिक जानकारियां निकलकर सामने आई हैं, वे किसी के भी रोंगटे खड़े करने के लिए काफी हैं। एक 29 वर्षीय महिला ने अपने दो मासूम बच्चों के साथ ऐसा आत्मघाती कदम क्यों उठाया, यह सवाल अब पूरे इलाके में गूंज रहा है। घटनास्थल पर पहुंची जांच टीम को प्रारंभिक साक्ष्यों से यह अंदेशा है कि यह पूरा मामला गहरे मानसिक तनाव और लंबे समय से चले आ रहे पारिवारिक मनमुटाव का चरम बिंदु हो सकता है।


मृतकों की पहचान श्रीवंती और उनके दो बेटों, कार्तिक व कौशिक के रूप में की गई है। इस दुखद अंजाम की पटकथा काफी समय पहले से लिखी जा रही थी, जब श्रीवंती और उनके पति प्रवीण के बीच वैवाहिक कलह शुरू हुई थी। लगभग 13 साल पहले विवाह के बंधन में बंधे इस जोड़े के बीच दरार तब और गहरी हो गई, जब प्रवीण ने कथित तौर पर दूसरी शादी कर ली। इसी विवाद के चलते श्रीवंती अपने बच्चों को लेकर वारंगल स्थित अपने मायके चली गई थी। हालांकि, सामाजिक दबाव और परिवार के बुजुर्गों की मध्यस्थता के बाद उसे सोमवार की रात ही वापस हैदराबाद भेजा गया था, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह वापसी उसकी और उसके बच्चों की आखिरी यात्रा साबित होगी।


घटना का खुलासा तब हुआ जब मंगलवार दोपहर करीब 1:30 बजे प्रवीण अपने काम से घर लौटा और उसने मुख्य द्वार को भीतर से बंद पाया। बार-बार पुकारने और कुंडी खटखटाने के बाद भी जब अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो अनहोनी की आशंका में पड़ोसियों की मदद ली गई। दरवाजा तोड़कर जब लोग भीतर दाखिल हुए, तो वहां का मंजर देखकर सबके पैरों तले जमीन खिसक गई। सूचना मिलने पर दोपहर 2:30 बजे कुकटपल्ली पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए गांधी अस्पताल रवाना किया। पुलिस अब इस बात की कड़ाई से जांच कर रही है कि बच्चों की जान कैसे ली गई और श्रीवंती ने किस मानसिक स्थिति में इस भयावह कदम को अंजाम दिया।


वर्तमान में पुलिस ने इस मामले में कठोर कानूनी रुख अपनाते हुए प्रवीण के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है ताकि मौत के सटीक कारणों और समय का वैज्ञानिक विवरण प्राप्त हो सके। जांच अधिकारी उन परिस्थितियों का भी बारीकी से विश्लेषण कर रहे हैं, जो श्रीवंती के वारंगल से लौटने के बाद चंद घंटों के भीतर इतनी घातक बन गईं। यह मामला न केवल एक आपराधिक वारदात है, बल्कि उन अनसुलझे घरेलू विवादों की ओर भी इशारा करता है जो बंद दरवाजों के पीछे मासूमों की बलि ले लेते हैं।

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