आसमान से राहत या आफत की आहट? किसानों के लिए बदलते मौसम ने खड़े किए बड़े सवाल
बेमौसम बरसात के थमने के बीच बढ़ते पारे ने बढ़ाई चिंता, तटीय इलाकों में अलर्ट से मची खलबली।

उत्तर और मध्य भारत के खेतों में पिछले कई दिनों से मची उथल-पुथल के बीच मौसम विभाग के एक ताजा बुलेटिन ने नई चर्चा छेड़ दी है। पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के कारण जिस तरह से आसमान से बिन बुलाए बादलों ने फसलों पर कहर बरपाया था, उसे लेकर अन्नदाता बेहद डरे हुए थे। विभाग ने अब इस सिलसिले पर विराम लगने के संकेत तो दिए हैं, लेकिन यह शांति अपने साथ एक नया संकट लेकर आ रही है। जानकारों का मानना है कि बारिश का जाना केवल एक अस्थायी राहत हो सकती है, क्योंकि इसके तुरंत बाद जो मौसमी बदलाव होने वाले हैं, वे स्वास्थ्य और कृषि दोनों के लिहाज से काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं। प्रशासन अब इस बात का आकलन कर रहा है कि अचानक बंद हुई बारिश के बाद जो उमस और गर्मी बढ़ेगी, उसका सामना कैसे किया जाए।
मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो देश के दक्षिणी और पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में जो हलचल देखी जा रही है, वह सामान्य नहीं है। आईएमडी ने साफ कर दिया है कि भले ही इस हफ्ते उत्तर भारत के लोगों को चुभती गर्मी से थोड़ी मोहलत मिल जाए, लेकिन दक्षिण भारत और तटीय इलाकों में पारा रिकॉर्ड तोड़ने की तैयारी में है। विशेष रूप से पश्चिमी तटों के पास रहने वाले लोगों के लिए प्रशासन ने सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। यह चिंताजनक इसलिए भी है क्योंकि जल्द ही इस गर्मी का असर बंगाल और ओडिशा के इलाकों तक फैलने की आशंका जताई गई है। एक तरफ जहां उत्तर भारत में तापमान फिलहाल नियंत्रण में दिख रहा है, वहीं दूसरी ओर देश के बड़े हिस्से में लू और बढ़ते तापमान की आहट ने स्थानीय अधिकारियों की नींद उड़ा दी है।
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे की कड़वी सच्चाई यह है कि बेमौसम बारिश ने पहले ही खेती के गणित को बिगाड़ दिया था। अब अचानक होने वाला यह 'थर्मल ट्रांजिशन' फसलों की गुणवत्ता और भंडारण पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। स्थानीय कृषि केंद्रों और किसान यूनियनों की ओर से भी इस बदलते मिजाज पर चिंता व्यक्त की गई है। राहत की खबर केवल इतनी है कि इस सात दिनों के भीतर उत्तर और मध्य भारत के बड़े शहरों में चिलचिलाती धूप का वो रौद्र रूप नहीं दिखेगा जो आमतौर पर इस समय शुरू हो जाता है। हालांकि, मौसम विभाग की यह रिपोर्ट एक बड़ी चेतावनी की तरह है कि आने वाले दिनों में गर्मी का जो प्रहार होगा।
