डोडा में सेना के वाहन का भीषण हादसा: 200 फीट गहरी खाई में गिरी गाड़ी, 4 जवान शहीद, 9 घायल
भदेरवाह के खानी टॉप इलाके में ड्यूटी पर जाते समय दर्दनाक दुर्घटना, रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद घायलों को एयरलिफ्ट कर उधमपुर पहुंचाया गया

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले से एक बेहद दुखद और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। भदेरवाह क्षेत्र के खानी टॉप इलाके में भारतीय सेना का एक वाहन अचानक अनियंत्रित होकर करीब 200 फीट गहरी खाई में जा गिरा। इस दर्दनाक हादसे में देश के लिए ड्यूटी पर तैनात चार जवान शहीद हो गए, जबकि नौ अन्य सैनिक गंभीर रूप से घायल हो गए। सेना की ओर से हादसे की पुष्टि करते हुए बताया गया कि दुर्घटना की सूचना मिलते ही राहत एवं बचाव कार्य तत्काल शुरू कर दिया गया था।
हादसा उस समय हुआ जब सेना का वाहन ऊंचाई पर स्थित एक अग्रिम पोस्ट की ओर जा रहा था। रास्ता अत्यंत संकरा, पहाड़ी और जोखिम भरा बताया जा रहा है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार वाहन चालक ने अचानक नियंत्रण खो दिया, जिससे बुलेटप्रूफ गाड़ी गहरी खाई में गिर गई। वाहन में कुल 17 जवान सवार थे, जिनमें से कई को गंभीर चोटें आईं। चार जवान इतने गंभीर रूप से घायल थे कि तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और उन्होंने मौके पर ही वीरगति प्राप्त कर ली।
दुर्घटना की जानकारी मिलते ही सेना, स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें तुरंत घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्गम पहाड़ी इलाका और खराब मौसम रेस्क्यू ऑपरेशन में बड़ी चुनौती बने रहे, इसके बावजूद जवानों को बाहर निकालने का अभियान तेजी से चलाया गया। घायलों को पहले मौके पर ही प्राथमिक चिकित्सा दी गई और इसके बाद गंभीर रूप से जख्मी सैनिकों को एयरलिफ्ट कर उधमपुर स्थित सैन्य अस्पताल भेजा गया, जहां उनका इलाज जारी है। अधिकारियों के अनुसार घायलों में से तीन जवानों की हालत नाजुक बनी हुई है।
सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटनाग्रस्त वाहन विशेष रूप से सुरक्षित बुलेटप्रूफ था, लेकिन पहाड़ी क्षेत्र में अचानक संतुलन बिगड़ने के कारण यह हादसा टल नहीं सका। घटना के बाद पूरे सैन्य क्षेत्र में शोक की लहर है। शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी जा रही है और उनके परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया गया है। सेना ने कहा है कि हादसे के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
यह दुर्घटना एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में तैनात सुरक्षाबलों के सामने मौजूद खतरों को उजागर करती है, जहां विषम भौगोलिक परिस्थितियों और कठिन मौसम में जवान दिन-रात देश की सुरक्षा में जुटे रहते हैं। डोडा का यह हादसा न केवल सेना के लिए बल्कि पूरे देश के लिए गहरा आघात है, जिसने चार वीर सपूतों को हमेशा के लिए खो दिया।
