कानपुर में रेल पटरी पर जोरदार धमाका: आखिर महाबोधि एक्सप्रेस के पास मिले उस बैग और आधार कार्ड का क्या है रहस्य?
दिल्ली-प्रयागराज रूट पर आधी रात को गूँजी धमाके की आवाज, मौके पर मिले सुरागों ने पुलिस और जांच एजेंसियों के उड़ाए होश।

उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर में उस समय हड़कंप मच गया जब दिल्ली-प्रयागराज मुख्य रेलवे मार्ग पर एक संदिग्ध विस्फोट की घटना सामने आई। कानपुर सेंट्रल स्टेशन से महज दो किलोमीटर की दूरी पर हुए इस धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास के रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोग दहशत के मारे अपने घरों से बाहर निकल आए। बुधवार की रात हुई इस घटना ने रेल सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती इनपुट के अनुसार, पटरी के समीप पांच लीटर की क्षमता वाले एक छोटे एलपीजी सिलेंडर में ब्लास्ट हुआ था। धमाके की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन के साथ-साथ रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और क्राइम ब्रांच की टीमें सक्रिय हो गईं और आनन-फानन में घटनास्थल की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी गई। शुरुआती जांच के दौरान यह आशंका प्रबल होती दिख रही है कि यह सिलेंडर संभवतः महाबोधि एक्सप्रेस जैसी किसी गतिशील ट्रेन से नीचे फेंका गया था। सिलेंडर के गिरने और उसके बाद हुए रिसाव या घर्षण की वजह से विस्फोट की स्थिति बनी, जिससे रेलवे ट्रैक के आसपास का सुरक्षा घेरा फिलहाल सवालों के घेरे में है।
जांच एजेंसियों को घटनास्थल से कुछ ऐसे महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं, जो इस पूरी घटना को एक गहरे रहस्य की ओर ले जा रहे हैं। धमाके वाले स्थान के पास ही एक लावारिस बैग बरामद हुआ है, जिसकी तलाशी लेने पर उसमें से दैनिक उपयोग के कपड़े, कुछ बर्तन और एक मोबाइल फोन मिला है। हालांकि, सबसे चौंकाने वाली बरामदगी एक आधार कार्ड के रूप में हुई है, जिस पर प्रतापगढ़ जिले के निवासी ओम प्रकाश मिश्रा का नाम दर्ज है। पुलिस अब इस बात की कड़ाई से पड़ताल कर रही है कि बरामद बैग और आधार कार्ड का संबंध उसी व्यक्ति से है जिसने सिलेंडर ट्रेन से फेंका या फिर वह किसी बड़ी साजिश का शिकार हुआ है। जांचकर्ताओं का मानना है कि यदि यह सामान सिलेंडर फेंकने वाले व्यक्ति का है, तो उसकी गिरफ्तारी से इस पूरे घटनाक्रम के पीछे की असल मंशा स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल कानपुर पुलिस ने प्रतापगढ़ पुलिस के साथ समन्वय स्थापित किया है ताकि आधार कार्ड पर दर्ज पते की तस्दीक की जा सके और संबंधित व्यक्ति के परिजनों से पूछताछ कर उसकी लोकेशन का पता लगाया जा सके।
रेलवे ट्रैक पर हुए इस धमाके की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम ने भी मौके से साक्ष्य जुटाए हैं। क्षतिग्रस्त सिलेंडर के अवशेषों को जब्त कर प्रयोगशाला भेजा गया है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह महज एक मानवीय लापरवाही थी या इसके पीछे किसी प्रकार की तोड़फोड़ की योजना छिपी थी। सौभाग्यवश, जिस समय यह विस्फोट हुआ, उस दौरान कोई यात्री ट्रेन वहां से नहीं गुजर रही थी, अन्यथा एक बड़ी जनहानि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता था। आरपीएफ और स्थानीय पुलिस अब उन तमाम यात्रियों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज करने की कोशिश कर रही है जो उस समय आसपास मौजूद थे। सुरक्षा एजेंसियां इस बिंदु पर भी ध्यान केंद्रित कर रही हैं कि क्या चलती ट्रेन में ज्वलनशील पदार्थ ले जाया जा रहा था, जो नियमों का उल्लंघन है। इस रहस्यमयी घटना ने न केवल कानपुर बल्कि पूरे दिल्ली-प्रयागराज रूट पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है, जबकि पुलिस के लिए 'ओम प्रकाश मिश्रा' नाम की गुत्थी सुलझाना अब सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
