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बीच आसमान में अचानक उठा धुआं और मच गई चीख-पुकार, लखनऊ एयरपोर्ट पर 148 जिंदगियों की अग्निपरीक्षा!

बागडोगरा से दिल्ली के सफर में अचानक बदला मंजर, पायलट की सूझबूझ और एटीसी के एक फैसले ने टाला बड़ा विमान हादसा.

बीच आसमान में अचानक उठा धुआं और मच गई चीख-पुकार, लखनऊ एयरपोर्ट पर 148 जिंदगियों की अग्निपरीक्षा!
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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट पर बीती शाम उस वक्त अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब हवा में गोते लगा रहे एक यात्री विमान को बेहद नाजुक परिस्थितियों के बीच जमीन पर उतरना पड़ा। दरअसल, बागडोगरा से देश की राजधानी दिल्ली की ओर उड़ान भर रहे इस विमान के केबिन में अचानक धुएं का गुबार दिखाई देने लगा, जिससे देखते ही देखते यात्रियों के बीच दहशत फैल गई। विमान में सवार 148 जिंदगियां एक अनहोनी की आशंका से सिहर उठी थीं, क्योंकि आसमान की ऊंचाइयों पर तकनीकी खराबी और धुएं का मेल किसी बड़े खतरे की दस्तक माना जाता है। विमान के क्रू और पायलट ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए पलक झपकते ही सुरक्षा प्रोटोकॉल को सक्रिय किया और निकटतम हवाई अड्डे से संपर्क साधा।


शाम के करीब 5:30 बजे जब सूरज ढलने की तैयारी में था, तभी लखनऊ एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को पायलट की ओर से इमरजेंसी सिग्नल मिला। पायलट ने विमान के भीतर धुआं उठने की जानकारी देते हुए तत्काल लैंडिंग की अनुमति मांगी, जिसके बाद एयरपोर्ट प्रशासन ने बिना किसी देरी के रनवे को खाली करवाया और आपातकालीन सेवाओं को अलर्ट मोड पर डाल दिया। लखनऊ एटीसी से हरी झंडी मिलते ही विमान को सुरक्षित तरीके से रनवे पर उतारा गया, जिससे विमान में सवार सभी 148 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों ने राहत की सांस ली। यह पूरी प्रक्रिया किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं थी, जहाँ समय की एक-एक सेकंड कीमती थी और जरा सी चूक एक बड़ी त्रासदी का सबब बन सकती थी।


विमान की सुरक्षित लैंडिंग के बाद तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने तुरंत जांच शुरू कर दी ताकि धुएं के असली कारणों का पता लगाया जा सके। इस बीच, लखनऊ एयरपोर्ट पर फंसे हुए यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई और उनमें से कुछ यात्रियों को दूसरी उड़ानों के जरिए उनकी मंजिल यानी दिल्ली के लिए रवाना किया गया। एयरपोर्ट अथॉरिटी और संबंधित एयरलाइंस अब इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रहे हैं कि उड़ान के दौरान इस तरह की तकनीकी खामी कैसे उत्पन्न हुई। इस घटना ने एक बार फिर विमानों के रखरखाव और सुरक्षा मानकों को लेकर चर्चा छेड़ दी है, हालांकि पायलट की त्वरित निर्णय क्षमता और लखनऊ प्रशासन के बेहतर समन्वय की चारों ओर सराहना हो रही है।

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