महाशिवरात्रि पर देशभर में शिवभक्ति का महासागर, उज्जैन महाकाल मंदिर में भस्मारती, 44 घंटे खुले रहेंगे पट
महाशिवरात्रि पर शिवालयों में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, उज्जैन में बाबा महाकाल की दिव्य भस्मारती

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर देशभर के मंदिरों और शिवालयों में ‘बम-बम भोले’ के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा है। उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक शिवभक्तों की भारी भीड़ मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए उमड़ी है। काशी से लेकर उज्जैन तक आस्था का सैलाब देखने को मिल रहा है। विशेषकर काशी विश्वनाथ सहित देश के प्रमुख शिवधामों में देर रात से ही लंबी कतारें लगी रहीं, जहां श्रद्धालु रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और रात्रि जागरण में सहभागी बने।
इस बीच मध्यप्रदेश की धर्मनगरी उज्जैन में महाशिवरात्रि का उत्सव अत्यंत भव्य और पारंपरिक तरीके से मनाया गया। महाकालेश्वर मंदिर में तड़के तीन बजे विशेष पंचामृत अभिषेक के साथ बाबा महाकाल की दिव्य भस्मारती संपन्न हुई। इस अद्भुत अनुष्ठान के साक्षी बनने के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे। मंदिर प्रशासन के अनुसार महाशिवरात्रि के अवसर पर अब लगातार 44 घंटे तक मंदिर के पट खुले रहेंगे, इस दौरान करीब 10 लाख भक्तों के दर्शन करने की संभावना जताई गई है।
भस्मारती से पूर्व बाबा महाकाल को दूध, दही, घी, शक्कर और शहद से पंचामृत स्नान कराया गया। इसके बाद चंदन लेपन और सुगंधित द्रव्यों से श्रृंगार किया गया। बाबा की प्रिय विजया यानी भांग से विशेष सजावट की गई और श्वेत वस्त्र धारण कराए गए। इसके पश्चात भस्म रमाने की परंपरा निभाई गई, जिसमें ढोल-नगाड़ों, झांझ-मंजीरों और शंखनाद के बीच वातावरण शिवमय हो गया। यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत भावविभोर करने वाला रहा।
फाल्गुन मास में उज्जैन में महाशिवरात्रि को भगवान शिव के विवाह उत्सव के रूप में मनाने की अनूठी परंपरा है। इस अवसर पर शिव नवरात्रि महोत्सव आयोजित होता है, जिसमें नौ दिनों तक बाबा महाकाल को दूल्हा स्वरूप में सजाया जाता है। इन नौ दिनों में प्रतिदिन अलग-अलग श्रृंगार किए जाते हैं और इसके बाद महाशिवरात्रि का मुख्य पर्व मनाया जाता है। शिवरात्रि के अगले दिन बाबा को दूल्हे की भांति सेहरा पहनाया जाता है। यही वह विशेष दिन होता है, जब वर्ष में एकमात्र अवसर पर दोपहर के समय भस्मारती होती है और बाबा का सेहरा बाद में प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं को वितरित किया जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उज्जैन में भगवान शिव भूतभावन महाकाल के रूप में विराजमान हैं। बारह ज्योतिर्लिंगों में यह एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है, जिसकी प्रतिमा दक्षिणमुखी है। यही कारण है कि महाकालेश्वर धाम का विशेष धार्मिक और तांत्रिक महत्व भी माना जाता है। महाशिवरात्रि के मौके पर यहां की गई पूजा-अर्चना और भस्मारती को मोक्षदायी माना जाता है, जिसके दर्शन मात्र से भक्त स्वयं को धन्य समझते हैं।
