मंधना हॉस्टल कांड: 'हाफ एनकाउंटर' के डर से सफेदपोशों की शरण में पहुंचे आरोपी, 55 घंटे बाद आखिर कैसे हुआ इनका अंत?
कानपुर से वाराणसी तक पुलिस की भागदौड़ और रसूखदारों की दखलअंदाजी के बीच उलझी हैवानियत की यह अनकही दास्तां।

कानपुर के मंधना स्थित एक हॉस्टल में वाराणसी की किशोरी के साथ हुई दरिंदगी के मामले में करीब 55 घंटे तक चले लुका-छिपी के खेल का नाटकीय अंत हो गया है। पुलिस की लगातार बढ़ती दबिश और 'हाफ एनकाउंटर' के खौफ ने इस जघन्य अपराध के फरार आरोपियों, निहाल सिंह और नितेश दुबे उर्फ बिल्लू, को इस कदर हिला दिया कि वे कथित तौर पर खुद को बचाने के लिए कुछ रसूखदारों और सफेदपोशों की शरण में पहुंच गए थे। चर्चाओं का बाजार गर्म है कि गिरफ्तारी से पहले इन आरोपियों ने एक प्रभावशाली अधिकारी के दफ्तर का दरवाजा भी खटखटाया था, ताकि पुलिस की कठोर कार्रवाई से बचा जा सके। हालांकि, कानून के लंबे हाथों ने आखिरकार शुक्रवार दोपहर गंगा बैराज के पास गंभीरपुर कछार मोड़ पर उनकी घेराबंदी कर उन्हें दबोच लिया, जिसके बाद उन्हें सीधे सलाखों के पीछे भेज दिया गया।
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत तब हुई जब वाराणसी के कैंट थाना क्षेत्र की रहने वाली किशोरी को मंधना में कमरा दिलाने का झांसा देकर पदम त्रिपाठी नामक व्यक्ति अपने साथ ले गया। उस रात हॉस्टल की चारदीवारी के भीतर मानवता को शर्मसार करने वाला वह घिनौना मंजर शुरू हुआ, जहां पदम और उसके दो साथियों ने पांच घंटों तक किशोरी को बंधक बनाकर उसके साथ हैवानियत की हदें पार कर दीं। सुबह जब एक अन्य युवक ने किशोरी की बदहाल स्थिति देखी और डायल 112 को सूचित किया, तब जाकर इस खौफनाक वारदात का खुलासा हुआ। पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता पदम त्रिपाठी को बुधवार को ही गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन उसके रसूखदार साथियों की तलाश में पुलिस को काफी पसीना बहाना पड़ा।
कानूनी प्रक्रियाओं के बीच इस मामले में एक नया मोड़ तब आया जब रामनवमी के सार्वजनिक अवकाश के कारण पीड़िता के मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान (कलमबंद बयान) दर्ज नहीं हो सके। वर्तमान में पीड़िता को वन स्टॉप सेंटर की सुरक्षा में रखा गया है, लेकिन पुलिस की मुश्किलें तब बढ़ गईं जब किशोरी के परिजन निर्धारित समय पर कानपुर नहीं पहुंचे। मामले की गंभीरता और साक्ष्यों को पुख्ता करने के दबाव के बीच पुलिस ने अब एक विशेष टीम को वाराणसी रवाना किया है, जो किशोरी के पिता को साथ लेकर आएगी और उम्र से संबंधित जरूरी दस्तावेज जुटाएगी। किशोरी के नाबालिग होने के साक्ष्य इस केस की दिशा तय करने में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित होने वाले हैं।
प्रशासन और पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि क्या हॉस्टल के संचालन में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई थी और किन परिस्थितियों में आरोपियों को वहां इतनी छूट मिली। स्थानीय लोगों और विपक्षी दलों में इस बात को लेकर भी भारी आक्रोश है कि आरोपियों को संरक्षण देने में किन सफेदपोशों का हाथ था। पुलिस कमिश्नरेट कानपुर ने स्पष्ट किया है कि अपराधियों को बचाने की कोशिश करने वालों पर भी नजर रखी जा रही है और चार्जशीट में हर उस पहलू को शामिल किया जाएगा जो इस पीड़िता को जल्द से जल्द न्याय दिलाने में सहायक हो। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे क्षेत्र में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है और कानूनी प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
