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मारकापुरम के पास सड़क पर मौत का तांडव: क्या लापरवाही ने निगल लीं दर्जनों जिंदगियां?

धुएं के गुबार और चीख-पुकार के बीच सुलगते सवाल, आखिर इस तबाही का जिम्मेदार कौन?

मारकापुरम के पास सड़क पर मौत का तांडव: क्या लापरवाही ने निगल लीं दर्जनों जिंदगियां?
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आंध्र प्रदेश के मारकापुरम जिले में गुरुवार की सुबह एक ऐसी हृदयविदारक घटना की गवाह बनी, जिसने न केवल स्थानीय प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि सड़क सुरक्षा के दावों की भी पोल खोल दी है। रायवरम के समीप घटित हुए इस खौफनाक मंजर ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है, जहां एक सामान्य यात्रा अचानक एक जलते हुए नर्क में तब्दील हो गई। दो भारी वाहनों के बीच हुई इस अनपेक्षित और भीषण भिड़ंत ने आसपास के इलाके में सन्नाटा पसरा दिया है और अब हर जुबान पर सिर्फ यही सवाल है कि क्या इस बड़ी जनहानि को टाला जा सकता था या फिर यह नियति का कोई क्रूर खेल था।


घटना की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बजरी से लदे एक टिपर ट्रक और यात्रियों से खचाखच भरी बस के बीच हुई टक्कर के तुरंत बाद वहां आग का एक विशाल गोला बन गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाका इतना जबरदस्त था कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला और देखते ही देखते लपटों ने दोनों वाहनों को अपनी आगोश में ले लिया। पुलिस के प्रारंभिक विवरण इस बात की ओर इशारा करते हैं कि आग लगने की तीव्रता इतनी अधिक थी कि बस के पिछले हिस्से में बैठे लोग एक घातक जाल में फंस गए, जहां से बाहर निकलने का हर रास्ता बंद हो चुका था। इस अग्निकांड ने 14 मासूम जिंदगियों को पल भर में राख के ढेर में बदल दिया, जिससे समूचे क्षेत्र में शोक और आक्रोश की लहर है।


राहत और बचाव कार्यों के बीच पुलिस प्रशासन ने इस बात की पुष्टि की है कि इस भयावह हादसे में एक दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं, जिन्हें आनन-फानन में नजदीकी चिकित्सा केंद्रों में भर्ती कराया गया है। बचाव दल के अधिकारियों का मानना है कि मलबे के भीतर अभी भी कुछ अवशेष दबे हो सकते हैं, जिसके लिए क्रेन और कटर मशीनों की मदद ली जा रही है। जांच एजेंसियां अब इस पहलू पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं कि क्या यह हादसा मानवीय भूल का नतीजा था या फिर वाहनों की तकनीकी खराबी ने इस विनाशकारी अग्नि को जन्म दिया। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भी गहरा रोष है कि ऐसी व्यस्त सड़कों पर भारी वाहनों की आवाजाही के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती है, जिसका खामियाजा निर्दोष यात्रियों को भुगतना पड़ा है।

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