मथुरा में 'फरसा बाबा' की मौत पर मचा भारी बवाल: क्या वाकई यह महज एक हादसा था या कुछ और? पुलिस का बड़ा खुलासा
एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना और फिर अफवाहों का ऐसा सैलाब जिसने उड़ा दी प्रशासन की नींद, आखिर क्या है पर्दे के पीछे का सच?

उत्तर प्रदेश के मथुरा में कोसी थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुई एक संदिग्ध मौत और उसके बाद उपजे तनाव ने पूरे इलाके को एक संवेदनशील मोड़ पर खड़ा कर दिया है। विख्यात गौ-रक्षक 'फरसा बाबा' की जीवनलीला एक सड़क दुर्घटना में समाप्त होने के बाद जिस तरह से क्षेत्र में अशांति और अफवाहों का बाजार गर्म हुआ, उसने पुलिस प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की एक बड़ी चुनौती पेश कर दी है। इस मामले में नया मोड़ तब आया जब पुलिस ने भ्रामक सूचनाएं फैलाने और माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वाले 13 उपद्रवियों को सलाखों के पीछे भेज दिया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) ने इस संवेदनशील मामले पर आधिकारिक बयान जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि 20 मार्च की काली रात को जो कुछ भी हुआ, वह किसी साजिश का हिस्सा नहीं बल्कि एक भीषण सड़क हादसा था।
पुलिस की जांच के अनुसार, एक अनियंत्रित ट्रक की चपेट में आने से फरसा बाबा की दुखद मृत्यु हुई, लेकिन इस सामान्य सी दिखने वाली दुर्घटना ने तब विवाद का रूप ले लिया जब सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर इसे अलग रंग देने की कोशिश की गई। प्रशासन ने बेहद मुस्तैदी दिखाते हुए न केवल हालात पर काबू पाया है, बल्कि आम जनता से किसी भी तरह की अनर्गल बातों पर यकीन न करने की भावुक अपील भी की है।
मामले की गहराई में जाएं तो यह तथ्य सामने आता है कि जिस ट्रक से यह टक्कर हुई थी, उसकी विभीषिका इतनी अधिक थी कि न केवल बाबा बल्कि ट्रक का चालक भी गंभीर रूप से चोटिल हुआ था। पुलिस ने आधिकारिक रूप से इस बात की पुष्टि की है कि उपचार के दौरान उस ट्रक ड्राइवर ने भी दम तोड़ दिया है, जिससे इस मामले की कड़ियाँ आपस में जुड़ती नजर आ रही हैं। घटना के बाद फरसा बाबा के एक सहयोगी की तहरीर पर कोसी थाने में विधिवत मुकदमा पंजीकृत किया गया है और पुलिस तकनीकी व वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर तफ्तीश को आगे बढ़ा रही है। शुरुआत में इस मौत को लेकर जिस तरह का आक्रोश और विरोध प्रदर्शन देखा गया, उसे देखते हुए भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी।
पुलिस का कहना है कि 13 आरोपियों की गिरफ्तारी उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो किसी की मृत्यु का लाभ उठाकर सांप्रदायिक या सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की चेष्टा करते हैं। फिलहाल, कोसी क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और पुलिस की आईटी सेल सक्रियता से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की निगरानी कर रही है ताकि किसी भी नई अफवाह को पनपने से पहले ही कुचला जा सके। प्रशासन का जोर अब शांति बहाली और कानूनी प्रक्रिया को पारदर्शिता के साथ पूर्ण करने पर है।
