मथुरा में आधी रात को हुए उस खूनी खेल के पीछे कौन? कोसीकलां की घटना ने खड़े किए कई अनसुलझे सवाल
गौ-सेवा के संकल्प और एक संदिग्ध हादसे के बीच उलझी मथुरा की कानून व्यवस्था, आखिर क्यों सुलग उठा दिल्ली-आगरा हाईवे?

मथुरा के कोसीकलां क्षेत्र में बीते घंटों जो कुछ भी घटा, उसने न केवल स्थानीय प्रशासन की नींद उड़ा दी है बल्कि एक ऐसे विवाद को जन्म दे दिया है जिसकी गूँज अब सीधे राजधानी तक पहुँच रही है। मामला एक ऐसे व्यक्तित्व की मृत्यु से जुड़ा है जिनकी पहचान ही उनके हाथ में मौजूद शस्त्र और गौ-रक्षा के प्रति उनके अटूट समर्पण से थी। 'फरसा वाले बाबा' के रूप में विख्यात चंद्रशेखर की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने ब्रज क्षेत्र में भारी तनाव पैदा कर दिया है। बताया जा रहा है कि एक सूचना पर गौ-तस्करों का पीछा कर रहे बाबा की बाइक को एक अज्ञात तेज रफ्तार वाहन ने जोरदार टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही जीवन लीला समाप्त हो गई।
इस घटना के बाद यह महज एक सड़क हादसा नहीं रह गया, बल्कि इसने एक बड़े संगठित अपराध की ओर इशारा कर दिया है। जैसे ही यह खबर फैली, कोसीकलां और आसपास के हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं का धैर्य जवाब दे गया और देखते ही देखते दिल्ली-आगरा नेशनल हाईवे रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। प्रदर्शनकारियों का साफ तौर पर आरोप है कि यह कोई दुर्घटना नहीं बल्कि सोची-समझी साजिश के तहत की गई हत्या है, जिसमें गौ-तस्करी में लिप्त गिरोह का हाथ है।
