मीरा भायंदर में आधी रात को उठी लपटों ने छीनीं कई जिंदगियां, क्या एक छोटी सी चिंगारी बनी तबाही की वजह?
इंद्रलोक फेज-4 की बस्तियों में मची चीख-पुकार के बीच सामने आए सुरक्षा के गंभीर सवाल, प्रशासन ने शुरू की जांच।

मुंबई के पास मीरा भायंदर इलाके में शुक्रवार की काली रात ने कई परिवारों को कभी न भूलने वाला जख्म दे दिया है। जब पूरा शहर सोने की तैयारी कर रहा था, तब इंद्रलोक फेज-4 स्थित झुग्गियों के एक हिस्से में अचानक आग लग गई, जिसने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। इस घटना की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आसमान छूती लपटों के बीच दो मासूम बच्चों और एक 40 वर्षीय व्यक्ति की जान चली गई। स्थानीय लोगों की मानें तो आग लगने के बाद मची अफरातफरी और चीख-पुकार के बीच किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। प्राथमिक जांच में इस विनाशकारी अग्निकांड की वजह बिजली के शॉर्ट सर्किट को माना जा रहा है, जिसने तंग बस्तियों के बीच मौत का जाल बुन दिया।
आग लगने के कुछ ही देर बाद स्थिति तब और अधिक विस्फोटक हो गई जब लपटों की तपिश ने झुग्गियों में रखे गैस सिलेंडरों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि इलाके में कई जोरदार धमाके सुनाई दिए, जिससे आसपास की इमारतों में रहने वाले लोग भी दहशत में आ गए। हालांकि, मौके पर पहुंची दमकल विभाग की मुस्तैदी ने एक बड़े खतरे को टाल दिया; जवानों ने अपनी जान जोखिम में डालकर कई सिलेंडरों को समय रहते जलते मलबे से बाहर निकाल लिया, अन्यथा हताहतों का आंकड़ा कहीं ज्यादा हो सकता था। पुलिस और फायर ब्रिगेड की संयुक्त टीम ने घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पाया, लेकिन तब तक सब कुछ राख में तब्दील हो चुका था।
देर रात करीब 1 बजे तक चले सर्च ऑपरेशन के दौरान प्रशासन ने मलबे को खंगालकर स्थिति का जायजा लिया। इस हादसे ने एक बार फिर घनी आबादी वाली झुग्गियों में बिजली की वायरिंग और सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी है। प्रभावित क्षेत्र के निवासियों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश और शोक है कि आखिर क्यों हर बार इस तरह की छोटी तकनीकी खामियां गरीबों की जिंदगी पर भारी पड़ती हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या सुरक्षा मानकों की जानबूझकर अनदेखी की गई थी। फिलहाल, पूरा इलाका गमगीन है और प्रशासन राहत कार्यों में जुटा हुआ है।
