मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर गैस टैंकर हादसे से हाहाकार, 30 घंटे तक ठप रहा ट्रैफिक, उद्योगपति को बुलाना पड़ा हेलीकॉप्टर
गैस रिसाव के चलते मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर लंबा जाम, आपातकालीन सुविधाओं की उठी मांग

गैस टैंकर पलटते ही थम गई रफ्तार, एक्सप्रेसवे बना पार्किंग जोन
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर मंगलवार शाम उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक गैस से भरा टैंकर दुर्घटनाग्रस्त होकर पलट गया। हादसे के तुरंत बाद टैंकर से अत्यधिक ज्वलनशील गैस का रिसाव शुरू हो गया, जिससे पूरे इलाके में खतरे की स्थिति बन गई। एहतियात के तौर पर पुलिस और प्रशासन ने एक्सप्रेसवे पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी। नतीजा यह हुआ कि सड़क पर हजारों वाहन घंटों तक जाम में फंसे रह गए।
सुरक्षा कारणों से 30 घंटे से अधिक बंद रहा मार्ग
हादसे के बाद गैस रिसाव को नियंत्रित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया। विस्फोट की आशंका को देखते हुए राहत और बचाव कार्य बेहद सावधानी से किया गया। इसी वजह से मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे को 30 घंटे से भी ज्यादा समय तक बंद रखना पड़ा। इस दौरान यात्री अपने वाहनों में फंसे रहे, कई लोगों को खाने-पीने और बुनियादी सुविधाओं की भी परेशानी झेलनी पड़ी।
आठ घंटे जाम में फंसे उद्योगपति, हेलीकॉप्टर से निकाला गया बाहर
इस लंबे जाम में देश के जाने-माने उद्योगपति सुधीर मेहता भी फंस गए थे। करीब आठ घंटे तक सड़क पर फंसे रहने के बाद हालात इतने गंभीर हो गए कि उन्हें बाहर निकालने के लिए हेलीकॉप्टर की मदद लेनी पड़ी। सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय से उन्हें एयरलिफ्ट किया गया, जिसके बाद यह घटना और ज्यादा चर्चा में आ गई।
आपातकालीन निकास और हेलीपैड की जरूरत पर उठे सवाल
हादसे से बाहर निकलने के बाद सुधीर मेहता ने सरकार और संबंधित एजेंसियों को अहम सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण और व्यस्त एक्सप्रेसवे पर आपातकालीन निकास मार्ग और हेलीपैड जैसी सुविधाएं होनी चाहिए। उनका मानना है कि इस तरह की व्यवस्था होने से भविष्य में किसी भी बड़े हादसे या आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित और समय पर निकाला जा सकता है।
एक्सप्रेसवे की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर बहस
यह घटना मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। लगातार बढ़ते ट्रैफिक और खतरनाक माल ढोने वाले वाहनों की आवाजाही को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मार्गों पर आधुनिक इमरजेंसी सिस्टम और वैकल्पिक निकासी योजनाएं समय की मांग बन चुकी हैं। इस हादसे के बाद प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा मानकों की समीक्षा की संभावना जताई जा रही है।

