साकीनाका के उस 'बंद कमरे' का खौफनाक सच: 18 महीने बाद कब्र से निकली गवाही ने सबको दहलाया
साजिश, सुपारी और सस्पेंस की ऐसी परतें जो आत्महत्या के दावों को चीरती हुई कातिल तक जा पहुंचीं

मुंबई के साकीनाका इलाके में करीब डेढ़ साल पहले बंद हुई एक फाइल ने अब पुलिस महकमे और आम जनता के बीच सनसनी फैला दी है। यह मामला किसी आम सुसाइड का नहीं, बल्कि एक बेहद ठंडे दिमाग से बुनी गई उस खौफनाक साजिश का है, जिसे अंजाम देने के लिए कानून की आंखों में धूल झोंकने की हर मुमकिन कोशिश की गई थी। शुरुआत में जिस शव को पंखे से लटका देखकर 'आत्महत्या' करार दे दिया गया था, उसके पीछे की हकीकत इतनी डरावनी निकलेगी, इसका अंदाजा शायद खुद जांच अधिकारियों को भी नहीं था। यह घटना एक पिता की कभी न टूटने वाली जिद और इंसाफ की उस लड़ाई की मिसाल बन गई है, जिसने एक सोए हुए मामले को कब्र से निकालकर हत्या के सनसनीखेज सच तक पहुंचा दिया।
घटनाक्रम के मुताबिक, 34 वर्षीया नारंगी उर्फ गीता की मौत को साढ़े छह लाख रुपये की एक बड़ी डील के जरिए 'परफेक्ट सुसाइड' की शक्ल देने की कोशिश की गई थी। गीता के पिता को पहले दिन से ही अपनी बेटी की मौत की परिस्थितियों पर गहरा संदेह था, जिसके बाद उनके निरंतर संघर्ष और प्रशासन पर बनाए गए दबाव के कारण शव को कब्र से निकालकर दोबारा पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। दूसरी फॉरेंसिक रिपोर्ट ने पूरी कहानी पलट कर रख दी; जहां पहले फांसी को मौत का कारण माना गया था, वहीं नई रिपोर्ट ने खुलासा किया कि मौत दम घुटने या गला दबाने से हुई थी। इसी मोड़ ने पुलिस को मजबूर किया कि वे उस शख्स पर शिकंजा कसें जो अब तक निर्दोष होने का स्वांग रच रहा था।
पुलिस की गहन तफ्तीश में जो तथ्य सामने आए, वे किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं हैं। मुख्य आरोपी और मृतका के पति सकाराम चौधरी का डिंपल चौधरी नामक महिला के साथ प्रेम संबंध था, और गीता इस अवैध रिश्ते की राह में सबसे बड़ा कांटा साबित हो रही थी। जांच में पता चला कि सकाराम ने इससे पहले भी अपनी पत्नी को रास्ते से हटाने के लिए दो असफल प्रयास किए थे, जिसमें एक बार चलती ट्रेन से धक्का देना और दूसरी बार जानलेवा हमले जैसी वारदातें शामिल थीं। जब वह खुद सफल नहीं हुआ, तो उसने अपने साथियों और सुपारी किलर्स के साथ मिलकर साढ़े छह लाख रुपये में अपनी ही पत्नी की मौत का सौदा कर लिया। वारदात वाली रात सकाराम ने खुद अपनी पत्नी के पैर पकड़े ताकि वह विरोध न कर सके, जबकि उसके साथियों ने रस्सी से गला घोंटकर उसकी जान ले ली। इस पूरे मामले में पुलिस ने आरोपी पति समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जिससे यह साफ हो गया है कि अपराध चाहे कितना भी शातिराना क्यों न हो, सच की गवाही को लंबे समय तक दफन नहीं किया जा सकता।
