नासिक में 'अदृश्य शक्तियों' के नाम पर रचे गए मायाजाल का पर्दाफाश, रसूखदारों के बीच पैठ जमाने वाले शख्स की असलियत ने सबको चौंकाया
क्या बंद कमरों में होने वाला 'चमत्कार' महज एक तकनीकी साजिश थी? जांच में सामने आए कुछ ऐसे सुराग जिन्होंने आस्था और भरोसे पर खड़े साम्राज्य की नींव हिला दी है।

महाराष्ट्र के नासिक में अध्यात्म और तंत्र-मंत्र की ओट में चल रहे एक बड़े खेल का भंडाफोड़ होने के बाद इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। लंबे समय से खुद को दिव्य शक्तियों का स्वामी बताने वाले एक स्वयंभू शख्स की गिरफ्तारी ने न केवल पुलिस महकमे को बल्कि समाज के रसूखदार तबकों को भी हैरत में डाल दिया है। यह मामला केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा नहीं है, बल्कि इसके पीछे भय, प्रलोभन और आधुनिक गैजेट्स के इस्तेमाल की एक गहरी साजिश नजर आ रही है। पुलिस द्वारा की गई हालिया कार्रवाई के बाद जिस तरह के साक्ष्य सामने आए हैं, वे बताते हैं कि कैसे आम लोगों की कमजोरियों और उनके विश्वास का फायदा उठाकर एक कृत्रिम आभा मंडल तैयार किया गया था। इस प्रकरण ने एक बार फिर उन दावों पर सवालिया निशान लगा दिया है, जहां चमत्कार के नाम पर लोगों का मानसिक और शारीरिक शोषण किया जाता है।
जांच अधिकारियों द्वारा जुटाए गए विवरणों से यह संकेत मिलता है कि आरोपी अशोक खरात उर्फ कैप्टन ने लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए मनोविज्ञान और तकनीक का बड़ा ही शातिर तालमेल बैठाया था। जिसे लोग दैवीय संकेत या चमत्कार समझकर नतमस्तक होते थे, उसकी असलियत रिमोट कंट्रोल से संचालित होने वाले उपकरणों में छिपी थी। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी के दरबार में केवल साधारण लोग ही नहीं, बल्कि समाज की कई नामचीन हस्तियां भी अपनी हाजिरी लगाती थीं। इसी रसूख का फायदा उठाकर आरोपी ने एक ऐसा सुरक्षा कवच तैयार कर लिया था, जिससे उसके काले कारनामों पर पर्दा पड़ा रहा। पुलिस की पूछताछ में यह भी स्पष्ट हुआ है कि वह अपने ठिकानों पर प्रतिबंधित वन्यजीवों के अवशेष और खाल जैसी वस्तुएं प्रदर्शित करता था, ताकि आने वाले भक्तों के मन में उसके रसूख और तथाकथित 'सिद्धियों' का गहरा खौफ पैदा हो सके।
आरोपी की कार्यप्रणाली इतनी बारीक थी कि वह मामूली और सस्ती चीजों को भी 'सिद्ध' बताकर ऊंचे दामों पर बेचने में माहिर था। जांच के दौरान पता चला कि बाजार में कौड़ियों के भाव मिलने वाले जंगली इमली के बीजों को पॉलिश करके और उन पर विशेष प्रक्रियाओं का ढोंग रचकर वह उन्हें चमत्कारी बता देता था। इन बीजों को 'मंत्रित' बताकर पीड़ितों को लाखों रुपये में थमाया जाता था। इसके अलावा, आम पत्थरों और कांच के टुकड़ों को दुर्लभ रत्नों के रूप में पेश करना उसके व्यापार का हिस्सा था। पुलिस के अनुसार, इस पूरे गोरखधंधे में महिलाओं की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने के गंभीर आरोप भी सामने आए हैं, जिसमें तंत्र-मंत्र की आड़ लेकर शोषण की बात कही गई है। वर्तमान में पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि इस सिंडिकेट में और कौन-कौन लोग शामिल थे और अब तक कितने लोग इस वित्तीय और मानसिक धोखाधड़ी का शिकार हो चुके हैं।
