रात का ट्रैफिक शोर बढ़ा रहा कोलेस्ट्रॉल, दिल की बीमारी का खतरा
यूके, नीदरलैंड और फिनलैंड के 2.7 लाख लोगों पर अध्ययन में पाया गया कि रात का ट्रैफिक शोर एलडीएल कोलेस्ट्रॉल बढ़ाकर हृदय रोग का जोखिम बढ़ा सकता है।

क्या रात का ट्रैफिक शोर दिल पर असर डाल रहा है
दिल की बीमारी को अक्सर खानपान, मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता से जोड़ा जाता है। लेकिन एक बड़े अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने संकेत दिया है कि रात में लगातार होने वाला ट्रैफिक शोर भी हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।
ब्रिटेन, नीदरलैंड और फिनलैंड के वैज्ञानिकों ने 2,72,229 वयस्कों पर शोध किया। अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों के घर रात में अधिक शोर वाली सड़कों के पास थे, उनके रक्त में एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक था। एलडीएल धमनियों में जमा होकर हृदय रोग का खतरा बढ़ाता है।
50 डेसिबल के बाद दिखने लगा असर
शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों के ब्लड सैंपल लेकर यह आकलन किया कि वे रात में कितने डेसिबल शोर के संपर्क में रहते हैं। परिणामों में एक स्पष्ट पैटर्न सामने आया।
करीब 50 डेसिबल से अधिक शोर पर कोलेस्ट्रॉल स्तर बढ़ने लगा। 55 डेसिबल या उससे अधिक पर यह संबंध और मजबूत दिखा। यह स्तर कई शहरी इलाकों में सामान्य माना जाता है।
महत्वपूर्ण बात यह रही कि वैज्ञानिकों ने वायु प्रदूषण, धूम्रपान, मोटापा, शिक्षा स्तर और लिंग जैसे कारकों को अलग करके विश्लेषण किया। इसके बाद भी शोर और बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल के बीच संबंध बना रहा।
कैसे किया गया अध्ययन
इस अध्ययन में सामान्य कोलेस्ट्रॉल जांच के बजाय न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस मेटाबोलोमिक्स तकनीक का उपयोग किया गया। इससे खून में मौजूद 155 प्रकार के वसा, प्रोटीन और अणुओं का विश्लेषण किया गया।
इनमें से 20 जैव रासायनिक संकेतकों में लगातार बदलाव पाया गया, जिनमें मध्यम और बड़े एलडीएल कण तथा कुल कोलेस्ट्रॉल शामिल थे।
हालांकि प्रति व्यक्ति बदलाव सीमित था, लेकिन बड़ी आबादी में इसका असर गंभीर हो सकता है।
नींद और हार्मोन पर प्रभाव
वैज्ञानिकों के अनुसार, रात का शोर नींद को बार बार बाधित करता है। भले ही व्यक्ति पूरी तरह न जागे, लेकिन नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
इससे शरीर में तनाव प्रतिक्रिया सक्रिय होती है और कॉर्टिसोल जैसे हार्मोन बढ़ते हैं। लंबे समय तक ऐसा होने पर शरीर वसा को नियंत्रित करने में कम सक्षम हो सकता है और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने लगता है।
शहरी आबादी पर बढ़ता जोखिम
यूरोपीय पर्यावरण एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार, 2020 में शहरी क्षेत्रों की 15 प्रतिशत से अधिक आबादी रात में 50 डेसिबल या उससे अधिक सड़क शोर के संपर्क में थी।
यह अध्ययन संकेत देता है कि हृदय रोग का जोखिम केवल जीवनशैली से नहीं, बल्कि रहने के वातावरण से भी जुड़ा हो सकता है। व्यस्त सड़कों के पास रहने वालों के लिए ट्रैफिक का शोर एक संभावित सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन सकता है।
