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ग्लोबल संकट के बीच पीएम मोदी का बड़ा आह्वान: क्या 'मन की बात' के इस संदेश ने बदल दी है देश की कूटनीतिक दिशा?

बदलते वैश्विक हालातों और सरहदों पर मडराते खतरों के बीच प्रधानमंत्री ने आखिर क्यों दी एकजुटता की सबसे बड़ी चेतावनी?

ग्लोबल संकट के बीच पीएम मोदी का बड़ा आह्वान: क्या मन की बात के इस संदेश ने बदल दी है देश की कूटनीतिक दिशा?
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो संबोधन 'मन की बात' के 132वें संस्करण में अंतरराष्ट्रीय पटल पर उपजे गंभीर संकटों और उनके देश पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील रुख अपनाया है। वर्तमान समय की अनिश्चितताओं को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि जिस प्रकार भारत ने वैश्विक महामारी कोरोना के भीषण दौर का डटकर मुकाबला किया था, ठीक उसी संकल्प शक्ति के साथ देश मौजूदा चुनौतियों से भी पार पाने में सक्षम है। यह संबोधन केवल सूचनात्मक नहीं था, बल्कि इसमें एक गहरा राजनीतिक संदेश भी छिपा था, जिसमें उन्होंने देश के तमाम राजनीतिक दलों को नसीहत देते हुए कहा कि नाजुक और संवेदनशील समय में राजनीति करने के बजाय राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना अनिवार्य है। उनके इस वक्तव्य ने राजनीतिक गलियारों में एक नई चर्चा छेड़ दी है कि क्या आगामी समय में देश को किसी बड़े संकट के लिए मानसिक रूप से तैयार रहने की आवश्यकता है।


वैश्विक परिस्थितियों का गहराई से विश्लेषण करते हुए पीएम मोदी ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि पिछले एक महीने से पड़ोस और उससे सटे क्षेत्रों में युद्ध की विभीषिका जारी है, जिसका सीधा असर भारत के उन लाखों परिवारों पर पड़ रहा है जिनके परिजन विदेशों में कार्यरत हैं। विशेष रूप से मिडिल ईस्ट यानी खाड़ी देशों में रह रहे एक करोड़ से अधिक भारतीयों की सुरक्षा को लेकर सरकार की संवेदनशीलता प्रधानमंत्री के शब्दों में साफ झलकी। उन्होंने खाड़ी देशों के प्रशासन के प्रति आभार प्रकट किया जो संकट की इस घड़ी में भारतीय नागरिकों को हर संभव सहायता और सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि खाड़ी देशों के साथ भारत के प्रगाढ़ संबंध ऐसे कठिन समय में हमारे नागरिकों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहे हैं, जो कूटनीतिक मोर्चे पर सरकार की बड़ी कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है।


संबोधन के दौरान देशवासियों से सीधा संवाद करते हुए प्रधानमंत्री ने जागरूकता को ही सबसे बड़ा हथियार बताया और लोगों से किसी भी प्रकार की भ्रामक खबरों या अफवाहों के जाल में न फंसने की पुरजोर अपील की। उन्होंने कहा कि चुनौतीपूर्ण समय में समाज का एकजुट रहना और सूचनाओं की सत्यता पर भरोसा करना ही देश की आंतरिक शक्ति को मजबूत करता है। पीएम मोदी का यह आग्रह ऐसे समय में आया है जब डिजिटल माध्यमों पर सूचनाओं का प्रवाह बहुत तीव्र है और भ्रांतियां फैलने की आशंका बनी रहती है। सरकार के इस पक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि वह न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास कर रही है, बल्कि घरेलू मोर्चे पर भी जनता को मानसिक रूप से सुदृढ़ और सतर्क रहने के लिए प्रेरित कर रही है, ताकि कोई भी बाहरी दबाव भारत की एकता और अखंडता को प्रभावित न कर सके।

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