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चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव ने किया सरेंडर: 9 करोड़ के बकाया विवाद में तिहाड़ जेल भेजे गए

करीब 9 करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर राजपाल यादव ने तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण किया।

चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव ने किया सरेंडर: 9 करोड़ के बकाया विवाद में तिहाड़ जेल भेजे गए
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बॉलीवुड के चर्चित अभिनेता और कॉमेडियन राजपाल यादव इन दिनों एक पुराने वित्तीय विवाद के कारण कानूनी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश के बाद उन्होंने 5 फरवरी 2026 को तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण कर दिया। यह मामला चेक बाउंस से जुड़ा है, जिसमें लगभग 9 करोड़ रुपये की देनदारी का विवाद सामने आया है। अदालत के आदेश के तहत अब उन्हें छह महीने की सजा भुगतनी होगी।


यह पूरा विवाद वर्ष 2010 से जुड़ा है, जब राजपाल यादव ने अपने निर्देशन में बनी पहली फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से करीब 5 करोड़ रुपये का ऋण लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी, जिसके चलते ऋण का भुगतान समय पर नहीं हो पाया। समय के साथ ब्याज, दंड और विलंब शुल्क जुड़ते गए और बकाया राशि बढ़कर लगभग 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। ऋण चुकाने के लिए जारी किए गए कई चेक बैंक से अनादरित हो गए, जिसके बाद संबंधित कंपनी ने उनके खिलाफ सात अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराईं।


वर्ष 2018 में मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत ने राजपाल यादव को दोषी करार देते हुए छह महीने के कारावास की सजा सुनाई थी। 2019 में सत्र न्यायालय ने भी इस फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जून 2024 में उच्च न्यायालय ने सजा पर अंतरिम रोक लगाते हुए उन्हें राहत दी थी, बशर्ते वे समझौता राशि का भुगतान सुनिश्चित करें। अदालत ने कई अवसर प्रदान किए और समय-समय पर सुनवाई के दौरान भुगतान की स्थिति पर जानकारी मांगी।


बताया जाता है कि वर्ष 2025 में उन्होंने 75 लाख रुपये जमा किए, लेकिन शेष राशि का भुगतान नहीं हो सका। अदालत ने बार-बार दिए गए आश्वासनों के बावजूद भुगतान न होने पर कड़ी टिप्पणी की और इसे गंभीरता से लिया। अंततः फरवरी 2026 में न्यायालय ने उन्हें आत्मसमर्पण करने का अंतिम निर्देश जारी किया। आदेश के पालन में उन्होंने तिहाड़ जेल में सरेंडर कर दिया।


कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सजा पूरी करने के बाद भी वित्तीय देनदारी स्वतः समाप्त नहीं होगी। बकाया राशि का निपटारा अलग से करना होगा, क्योंकि आपराधिक सजा और आर्थिक दायित्व दो अलग प्रक्रियाएं हैं। इस घटनाक्रम ने फिल्म जगत में भी चर्चा को जन्म दिया है और यह मामला अब कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण की ओर बढ़ेगा।

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