Public Khabar

अंश-अंशिका की सुरक्षित वापसी, बाल तस्करी गिरोह नेटवर्क पर रांची पुलिस की बड़ी कार्रवाई की तैयारी

12 दिन बाद रामगढ़ से सकुशल बरामदगी, आरोपी दंपती रिमांड पर, संगठित बाल तस्करी नेटवर्क की जांच तेज

अंश-अंशिका की सुरक्षित वापसी, बाल तस्करी गिरोह नेटवर्क पर रांची पुलिस की बड़ी कार्रवाई की तैयारी
X

झारखंड की राजधानी रांची से लापता हुए मासूम अंश और अंशिका को 12 दिनों के बाद रामगढ़ जिले से सुरक्षित बरामद कर लिया गया है। यह बरामदगी पुलिस के लिए राहत की खबर होने के साथ-साथ एक संगठित बाल तस्करी गिरोह की आशंका को भी मजबूत करती है। सबसे अहम भूमिका स्थानीय युवकों की सजगता ने निभाई, जिन्होंने समय रहते बच्चों की पहचान कर पुलिस तक सूचना पहुंचाई।

धुर्वा से लापता हुए थे दोनों बच्चे

रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र से 2 जनवरी को पांच वर्षीय अंश कुमार और चार वर्षीय अंशिका कुमारी लापता हुए थे। उन्हें खोजने के लिए रांची पुलिस के साथ-साथ झारखंड और अन्य राज्यों की पुलिस टीमें भी जुटी हुई थीं। जांच की कड़ी आखिरकार रामगढ़ जिले के रजरप्पा थाना क्षेत्र के अहमदनगर में जाकर खुली।

स्थानीय युवकों की सजगता से खुला मामला

स्थानीय युवक सचिन और डब्लू ने एक दंपती के साथ मौजूद दो बच्चों को देखकर संदेह जताया। बच्चों के हाव-भाव और गतिविधियों से उन्हें कुछ गड़बड़ लगी। उन्होंने बच्चों की तस्वीर ली और सोशल मीडिया पर चल रहे पोस्टर से परिजनों का नंबर निकालकर संपर्क किया। पुष्टि होते ही उन्होंने रजरप्पा पुलिस को सूचना दे दी।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई

सूचना मिलने के करीब दस मिनट के भीतर पुलिस मौके पर पहुंच गई। बच्चों को सुरक्षित कब्जे में लिया गया और उनके साथ मौजूद महिला व पुरुष को हिरासत में लेकर रामगढ़ पुलिस अधीक्षक के आवास पर ले जाया गया। बच्चों की सकुशल बरामदगी से पूरे इलाके में राहत का माहौल बन गया।

आरोपी दंपती से रिमांड पर पूछताछ

धुर्वा थाना पुलिस ने आरोपी दंपती को होटवार जेल से पांच दिन के रिमांड पर लिया है। उनसे पूछताछ कर यह जानने की कोशिश की जा रही है कि अपहरण का असली मकसद क्या था और वे किस नेटवर्क से जुड़े हुए हैं।

संगठित बाल तस्करी गिरोह की आशंका

पुलिस को शक है कि आरोपी दंपती एक संगठित बाल तस्करी गिरोह से जुड़ा हो सकता है, जो झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल से बच्चों को उठाकर अन्य राज्यों में मोटी रकम लेकर बेचता है। जिस योजनाबद्ध तरीके से बच्चों को भीड़भाड़ वाले इलाके से बाहर ले जाया गया, वह किसी बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है।

पुराने मामलों की दोबारा जांच

रांची पुलिस की कई टीमें अब पिछले तीन वर्षों में लापता हुए बच्चों के मामलों की दोबारा समीक्षा कर रही हैं। गुमशुदगी की रिपोर्ट और एफआईआर को इस केस से जोड़कर देखा जा रहा है, ताकि पुराने मामलों का भी खुलासा हो सके।

बच्चों का चौंकाने वाला बयान

बाल कल्याण समिति के सामने बच्चों ने बताया कि उन्हें पहले एक झोपड़ी में रखा गया था। रोने पर उनके साथ मारपीट की जाती थी। उन्होंने बताया कि वे बिस्कुट लेने निकले थे, लेकिन लौटते समय एक महिला और पुरुष ने जबरन ऑटो में बैठाकर उन्हें ले गए। एक दुकानदार ने रोकने की कोशिश की, लेकिन आरोपी उन्हें लेकर भाग गए।

बाल कल्याण समिति की भूमिका

रांची में सीडब्ल्यूसी के सभी पद रिक्त होने के कारण यह मामला फिलहाल लोहरदगा की बाल कल्याण समिति देख रही है। अध्यक्ष कांति साहू के अनुसार बच्चों का पूरा बयान अब सोमवार को दर्ज किया जाएगा।

बाल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

इस घटना ने राज्य की बाल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही यह भी साबित किया है कि आम नागरिकों की सजगता कई बार बड़े अपराध को उजागर करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

राहत के साथ चेतावनी भी

अंश और अंशिका की सुरक्षित वापसी राहत की खबर जरूर है, लेकिन यह भी एक चेतावनी है कि संगठित बाल तस्करी का खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। समाज और प्रशासन दोनों को और अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।
Tags:
Next Story
Share it