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राज्यसभा में संजय सेठ की मांग, वाराणसी को मिले यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सिटी का दर्जा

राज्यसभा सांसद संजय सेठ ने संसद में वाराणसी को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सिटी घोषित करने की मांग उठाई। काशी की सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन क्षमता पर आकर्षित किया सदन का ध्यान।

राज्यसभा में संजय सेठ की मांग, वाराणसी को मिले यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सिटी का दर्जा
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राज्यसभा में उठी वाराणसी को वर्ल्ड हेरिटेज सिटी बनाने की मांग

भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सेठ ने संसद में वाराणसी को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सिटी का दर्जा दिलाने की मांग उठाई। उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि इस दिशा में औपचारिक प्रस्ताव की प्रक्रिया तेज की जाए ताकि काशी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिल सके।

दुनिया के सबसे प्राचीन शहरों में गिनी जाती है काशी

राज्यसभा में अपने वक्तव्य के दौरान संजय सेठ ने कहा कि वाराणसी दुनिया के सबसे पुराने और निरंतर बसे हुए शहरों में गिनी जाती है। यहां के प्राचीन मंदिर, गंगा के ऐतिहासिक घाट और सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपराएं इस शहर को विशिष्ट बनाती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि काशी का संगीत, कला और स्थापत्य वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान रखते हैं।

विकास कार्यों का भी किया उल्लेख

संजय सेठ ने वाराणसी में हुए हालिया विकास कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले ग्यारह वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शहर के बुनियादी ढांचे में व्यापक बदलाव आया है। उनके अनुसार वर्ष 2014 से पहले शहर कई बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा था, लेकिन अब यह तेजी से आधुनिक सुविधाओं से युक्त शहर के रूप में विकसित हो रहा है।

60 हजार करोड़ से अधिक का निवेश

सांसद ने बताया कि विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से वाराणसी में 60,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है। काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर का निर्माण, घाटों का पुनर्विकास और प्रमुख सड़कों का चौड़ीकरण इस परिवर्तन के प्रमुख उदाहरण हैं। इसके अलावा रेलवे क्षेत्र में भी 10,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिससे परिवहन और कनेक्टिविटी में सुधार हुआ है।

पर्यटन में लगातार बढ़ोतरी

उन्होंने कहा कि इन विकास कार्यों का सीधा असर पर्यटन पर भी दिखाई दे रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में 7.26 करोड़ से अधिक पर्यटक वाराणसी पहुंचे और 120 देशों के लोग यहां दर्शन के लिए आए। इससे स्पष्ट होता है कि वाराणसी वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर तेजी से अपनी जगह मजबूत कर रहा है।

यूनेस्को में पहले से दर्ज है सांस्कृतिक पहचान

संजय सेठ ने बताया कि काशी को वर्ष 2015 में यूनेस्को के क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क के तहत सिटी ऑफ म्यूजिक के रूप में मान्यता मिल चुकी है। इसके बावजूद वाराणसी की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को अभी तक यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में आधिकारिक स्थान नहीं मिल पाया है।

टेंटेटिव सूची में शामिल हैं दो महत्वपूर्ण स्थल

उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 की शुरुआत तक भारत के 44 स्थल यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं। वर्ष 2017 में अहमदाबाद को देश का पहला वर्ल्ड हेरिटेज सिटी घोषित किया गया था और 2019 में जयपुर को यह सम्मान मिला। वाराणसी से जुड़े दो महत्वपूर्ण स्थल पहले से यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में शामिल हैं। इनमें सारनाथ वर्ष 1998 से और वाराणसी के ऐतिहासिक घाटों का समूह वर्ष 2021 से इस सूची में रखा गया है।

काशी को वैश्विक पहचान दिलाने की अपील

संजय सेठ ने अपने वक्तव्य के अंत में कहा कि अब समय आ गया है कि काशी को भी आधिकारिक रूप से वर्ल्ड हेरिटेज सिटी का दर्जा दिलाया जाए। उन्होंने केंद्र सरकार और संस्कृति मंत्रालय से इस दिशा में आवश्यक कदम जल्द उठाने का आग्रह किया ताकि इस प्राचीन और आध्यात्मिक नगरी को वैश्विक स्तर पर उचित सम्मान मिल सके।

सदन की कार्रवाई के दौरान अपनी बात रखते राज्यसभा सांसद संजय सेठ
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