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हिमालय की गोद में बाबा बर्फानी का बुलावा: इस बार 57 दिनों का होगा कठिन सफर, जानें कब से खुल रहे हैं किस्मत के द्वार?

श्रद्धालुओं के लिए जारी हुई नई गाइडलाइंस और तारीखें, प्रशासन ने आस्था के इस महापर्व के लिए कसी कमर।

हिमालय की गोद में बाबा बर्फानी का बुलावा: इस बार 57 दिनों का होगा कठिन सफर, जानें कब से खुल रहे हैं किस्मत के द्वार?
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कश्मीर की वादियों में स्थित पवित्र गुफा की ओर रुख करने वाले शिव भक्तों के लिए साल 2026 की यात्रा का खाका तैयार हो गया है। इस बार बाबा बर्फानी के दर्शन की यह यात्रा विशेष होने वाली है क्योंकि प्रशासन ने इस आध्यात्मिक सफर के लिए कुल 57 दिनों का समय निर्धारित किया है। यात्रा का औपचारिक आगाज 3 जुलाई से होने जा रहा है, जो अगस्त के अंतिम सप्ताह यानी 28 अगस्त तक अनवरत जारी रहेगी। हालांकि, मुख्य यात्रा शुरू होने से काफी पहले ही ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन अवसर पर 19 जून को प्रथम पूजा का आयोजन किया जाएगा, जिससे इस पूरी कवायद का आध्यात्मिक बिगुल फूंक दिया जाएगा।


यात्रा पर जाने के इच्छुक श्रद्धालुओं के लिए सबसे अहम पड़ाव 15 अप्रैल से शुरू होने जा रहा है, जब देशभर में पंजीकरण की प्रक्रिया प्रारंभ होगी। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि बिना पूर्व रजिस्ट्रेशन के किसी भी यात्री को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए देशभर में 556 बैंक शाखाओं को अधिकृत किया गया है, जहां जाकर भक्त अपना अग्रिम पंजीकरण करवा सकते हैं। इसके साथ ही, डिजिटल इंडिया के दौर में ऑनलाइन आवेदन की खिड़की भी खोली जाएगी, ताकि घर बैठे ही लोग अपनी बारी सुरक्षित कर सकें। प्रशासन ने इस बार भी आयु सीमा को लेकर कड़े नियम लागू रखे हैं, जिसके तहत केवल 13 वर्ष से 70 वर्ष के बीच के लोग ही इस दुर्गम मार्ग पर चलने की पात्रता रखेंगे।


भौगोलिक चुनौतियों को देखते हुए भक्तों के पास दो पारंपरिक रास्ते उपलब्ध होंगे। पहला रास्ता पहलगाम के माध्यम से है, जो लगभग 48 किलोमीटर लंबा है और अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ धीरे-धीरे चढ़ाई के लिए जाना जाता है। वहीं, दूसरा विकल्प बालटाल का है, जो महज 14 किलोमीटर का है लेकिन अपनी खड़ी चढ़ाई और कठिन रास्तों के कारण जोखिम भरा माना जाता है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां इन दोनों ही मार्गों पर बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा घेरे को मजबूत करने में जुट गई हैं। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं, ताकि विपरीत मौसम या अन्य चुनौतियों के बीच भी श्रद्धालुओं को किसी बड़ी समस्या का सामना न करना पड़े।

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