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सुलतानपुर में एक 'अनअटेंडेड कॉल' के बाद मची ऐसी चीख-पुकार, जिसने पूरे गांव के रोंगटे खड़े कर दिए?

महज चंद सेकेंड की देरी और एक सनकी मिजाज, क्या डिजिटल युग का गुस्सा छीन रहा है अपनों की जिंदगी?

सुलतानपुर में एक अनअटेंडेड कॉल के बाद मची ऐसी चीख-पुकार, जिसने पूरे गांव के रोंगटे खड़े कर दिए?
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उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले में एक ऐसा खौफनाक मंजर देखने को मिला है, जिसने मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक रिश्तों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। धनपतगंज थाना क्षेत्र के सेवरा चरथई गांव में मंगलवार का सूरज एक ऐसी मनहूस खबर के साथ उगा, जिसने आसपास के कई गांवों को सन्न कर दिया। घर की दहलीज के भीतर शुरू हुआ एक मामूली विवाद चंद मिनटों में खूनी संघर्ष में तब्दील हो गया और एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां हमेशा के लिए दफन हो गईं। यह मामला उस वक्त और भी गंभीर हो गया जब जांच में यह बात निकलकर सामने आई कि इस पूरी हिंसा की जड़ में कोई पुरानी रंजिश या बड़ी वजह नहीं, बल्कि मोबाइल फोन की एक घंटी थी जिसका जवाब समय पर नहीं दिया गया था।


घटना की पृष्ठभूमि सोमवार की आधी रात से जुड़ी है, जब आरोपी नकछेद ने अपनी पत्नी कुसुम को फोन किया था। उस वक्त कुसुम फोन नहीं उठा सकी थी, और यही छोटी सी बात नकछेद के दिमाग में बारूद की तरह घर कर गई। मंगलवार की सुबह जब वह घर लौटा, तो उसके सिर पर खून सवार था। आरोप है कि उसने बिना कुछ सोचे-समझे कुसुम पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। घर में मौजूद मासूम बच्चों, उदयभान और दीक्षा ने अपनी मां को बचाने की हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन गुस्से में अंधे हो चुके पिता ने उन्हें भी धक्का देकर किनारे कर दिया। बच्चों ने पुलिस को दिए अपने बयान में बताया कि रात के वक्त भी हिंसा हुई थी, जिसके बाद वे अपनी मां को लेकर अपनी बड़ी मां के घर चले गए थे, लेकिन सुबह वापस आते ही दोबारा शुरू हुए हमले ने कुसुम की जान ले ली।


लहुलुहान हालत में कुसुम को स्थानीय लोगों की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन घाव इतने गहरे थे कि डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। इस सनसनीखेज वारदात की सूचना मिलते ही क्षेत्राधिकारी आशुतोष कुमार और थाना प्रभारी अंजू मिश्रा भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी पति को हिरासत में ले लिया है और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है और उसने आवेश में आकर इस वारदात को अंजाम देने की बात कही है। फिलहाल शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की जा रही है, ताकि मौत के सटीक कारणों और चोटों की गंभीरता का कानूनी दस्तावेज तैयार किया जा सके।


यह घटना समाज के उस पहलू को उजागर करती है जहां मोबाइल और तकनीक की व्यस्तता के बीच सहनशीलता का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। गांव में मातम पसरा हुआ है और लोग इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहे हैं कि एक पति अपनी पत्नी की जान महज इसलिए ले सकता है क्योंकि उसने फोन नहीं उठाया था। पुलिस प्रशासन ने गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए फोर्स तैनात कर दी है और मामले की कानूनी बारीकियों पर काम किया जा रहा है। बच्चों के बयान और पोस्टमार्टम रिपोर्ट इस केस में अहम सबूत साबित होंगे, जिसके आधार पर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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